*'क से कबूतर' नहीं, 'श से शराब' पढ़ा गए गुरुजी! नशे में धुत प्रिंसिपल ने बस स्टैंड पर किया 'तांडव', 70 रुपये की थाली खाकर गरीब को कार से रौंदा...

 

​पत्थलगांव। शिक्षा के मंदिर में जो गुरुजी बच्चों को 'सड़क सुरक्षा और अनुशासन' का पाठ पढ़ाते हैं, वे जब खुद 'बोतल' के अनुशासन में आ जाएं, तो परिणाम वही होता है जो आज पत्थलगांव के बस स्टैंड पर हुआ। बगूडेगा स्कूल के प्रिंसिपल (CS Rathiya) साहब ने आज स्कूल के ब्लैकबोर्ड की जगह सड़क को ही अपनी जागीर समझ लिया और नशे की हालत में एक मासूम को कार के नीचे रौंद डाला।

​'गंगा' में हाथ धोकर निकले, लेकिन पाप नहीं धुले...

मामला पत्थलगांव बस स्टैंड स्थित 'गंगा होटल' का है। होटल संचालक ने तो अपना पल्ला ऐसे झाड़ा है जैसे नेता चुनाव हारने के बाद जनता से झाड़ते हैं। होटल मालिक का कहना है- "साहब, हमारे यहाँ दारू नहीं मिलती। गुरुजी तो बाहर से ही 'टैंक फुल' करके आए थे। हमारे यहाँ तो बस 70 रुपये का शुद्ध खाना खाया। जब तक उनका ड्राइवर उन्हें खोजता हुआ आया, तब तक गुरुजी खुद स्टेयरिंग संभालकर 'डॉन' बन चुके थे और गाड़ी लेकर रफूचक्कर हो गए।"

​यानी, गुरुजी ने 70 रुपये की थाली तो खाई, लेकिन सड़क पर जो 'रायता फैलाया', उसकी कीमत कौन चुकाएगा?

https://youtu.be/rQZVa-R3D5M?si=sWEWeffbEfYcrffM

*​प्रिंसिपल का 'हाई-वोल्टेज' ड्रामा :* "मैं बगूडेगा का प्रिंसिपल हूँ!" एक्सीडेंट करने के बाद जहाँ आम आदमी की घीग्घी बंध जाती है, वहीं हमारे 'रथीया साहब' की हेकड़ी सातवें आसमान पर थी। 


गरीब आदमी को कार से उड़ाने के बाद जनाब को अपनी गलती का अहसास नहीं हुआ, बल्कि सीना ठोक कर चिल्ला रहे थे-  "जानते नहीं हो? मैं बगूडेगा स्कूल का प्रिंसिपल हूँ।"

​वाह गुरुजी वाह! क्या परिचय दिया है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस की एफआईआर में भी पद का रौब काम आएगा या कानून अपना काम करेगा?


*​ड्राइवर ढूंढता रहा, साहब ने कर दिया 'खेला' :* विडंबना देखिये, प्रिंसिपल साहब का ड्राइवर उन्हें ढूंढने होटल आया था कि साहब को सुरक्षित घर छोड़ दे, लेकिन साहब को तो आज 'सेल्फ-ड्राइव' का ऐसा नशा चढ़ा था कि उन्होंने न ड्राइवर का इंतज़ार किया, न होश का। बस एक्सीलेटर दबाया और सामने जो आया उसे उड़ा दिया।


*​घायल : सुबोध गुप्ता (शांतिनगर, तिलडेगा)* इस पूरे 'वीआईपी नशे' का शिकार बने तिलडेगा के शांतिनगर निवासी सुबोध गुप्ता। प्रिंसिपल की कार ने उन्हें ऐसी टक्कर मारी कि वे बुरी तरह घायल हो गए। गरीब आदमी सड़क पर तड़प रहा था और 'शिक्षक महोदय' अपनी पदवी का बखान कर रहे थे।


​सवाल सिस्टम से : क्या ऐसे 'नशेड़ी गुरुओं' के भरोसे ही नौनिहालों का भविष्य है? 70 रुपये का खाना और हजारों की शराब पीकर सड़क पर मौत बनकर दौड़ने वाले ऐसे प्रिंसिपल पर शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करेगा? या फिर मामला 'जांच' के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?


​जनता की राय : गुरुजी, स्कूल में एब्सेंट रहियेगा, लेकिन सड़क पर प्रेजेंट होकर किसी की जान मत लीजिये!

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