कुनकुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पैरासिटामोल टैबलेट में ‘काले धब्बे’ दिखने पर फार्मासिस्टों को नोटिस, फार्मासिस्ट ने पलटकर स्टोरकीपर पर लगाया गंभीर आरोप

कुनकुरी — सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कुनकुरी में पैरासिटामोल 650 एमजी टैबलेट के एक बैच में काले धब्बे दिखाई देने का मामला गरमा गया है। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो/पोस्ट के बाद खंड चिकित्सा अधिकारी ने दो फार्मासिस्टों — श्रीमति अनुपमा भगत व श्री धर्मेंद्र मिश्रा — को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

श्री अफरोज खान (आयु 41, ग्राम केराडीह) द्वारा 29 नवंबर 2025 को उपचार के दौरान प्राप्त दवा (बैच नंबर RT24049) में काले धब्बे दिखाई देने पर उन्होंने सोशल मीडिया में पोस्ट कर दावा किया कि ऐसी दवा से फूड प्वाइजनिंग, उल्टी-दस्त जैसी समस्या हो सकती है। मामला सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया।



BMO ने जारी किया नोटिस — 3 दिन में स्पष्टीकरण का निर्देश। 

खंड चिकित्सा अधिकारी, कुनकुरी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि: संबंधित बैच में काले धब्बे दिखने के बावजूद दवा का वितरण कैसे किया गया?


दोनों फार्मासिस्ट तीन दिवस के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।

स्पष्टीकरण असंतोषजनक होने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। इस नोटिस की प्रति कलेक्टर व CMHO जशपुर को भी भेजी गई है।



फार्मासिस्ट धर्मेंद्र मिश्रा ने दिए जवाब में किया बड़ा खुलासा।

नोटिस के जवाब में फार्मासिस्ट श्री धर्मेंद्र मिश्रा ने स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए—


01-- CGMSC ने पहले ही रोक लगा दी थी—पर जानकारी मुझ तक नहीं पहुंची।

CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन) द्वारा 25/08/2025 को पत्र जारी कर पैरासिटामोल 650 एमजी, बैच RT24049 के वितरण पर रोक लगा दी गई थी।

यह सूचना ई-मेल व व्हाट्सऐप ग्रुप में भेजी गई थी, लेकिन

“मैं CGMSC या CHC के किसी भी व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल नहीं हूं, इसलिए यह सूचना मुझे नहीं मिली।”

02-- स्टोर कीपर पर गंभीर आरोप — प्रतिबंधित दवा वापस भेजने में लापरवाही। फार्मासिस्ट ने लिखा—स्टोर कीपर को प्रतिबंधित बैच की दवा तत्काल ड्रगवेयर हाउस वापस भेजनी थी, लेकिन उन्होंने लापरवाही बरतते हुए वही दवा OPD काउंटर पर देते रहे। यह उनके कर्तव्य में गंभीर लापरवाही दर्शाता है

03-- पहले भी एक्सपायरी दवाएं दी गईं—शिकायतें हुईं लेकिन कार्रवाई नहीं फार्मासिस्ट ने यह भी बताया कि पूर्व में भी स्टोर कीपर द्वारा एक्सपायरी दवाएं दवा वितरण कक्ष को दी गई थीं।

इसकी मौखिक शिकायत BMO और लिखित शिकायत CHMO डॉ. रंजीत टोप्पो को दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

04 -- OPD की भारी भीड़ — हर दवा की जांच मौके पर करना संभव नहीं, भीड़ के कारण हर दवा की एक्सपायरी या गुणवत्ता जांचना तत्काल संभव नहीं होता। “यह गलती अनजाने में संभव है” — मिश्रा ने लिखा।


निष्कर्ष — जिम्मेदारी स्टोरकीपर पर, फार्मासिस्ट पर कार्रवाई न हो: मिश्रा


स्पष्टीकरण के अंत में फार्मासिस्ट ने आग्रह किया कि, प्रतिबंधित दवा स्टोर कीपर द्वारा ही दी गई थी, इस लापरवाही के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाए, और फार्मासिस्ट पर कोई कार्रवाई न की जाए।


मामला अब उच्च अधिकारी के पास—जांच के बाद होगी कार्रवाई


नोटिस की प्रतिलिपि कलेक्टर और CMHO को भेजे जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग मामले की विस्तृत जांच करेगा।

यह देखा जाएगा कि, प्रतिबंधित बैच की दवा OPD तक कैसे पहुंची?

वहीं स्टोर व्यवस्थापन, रिकॉर्डिंग और वितरण में किस स्तर पर लापरवाही हुई?


बहरहाल अब देखना होगा कि कुनकुरी CHC में दवा वितरण प्रणाली के मामले का जिम्मेदार कौन होगा या फिर यह मामला किसी ठंडे बस्ते में चला जाएगा। यह एक बड़ा सवाल है?

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