पत्थलगांव के कुमकेला में 'अधूरे कामो' का पूरा खेल! 12 साल से जमी है 'मलाई' की सल्तनत, सीएम हेल्पलाइन भी सुस्त

 


पत्थलगांव। कहते हैं कि सरकारी कागजों पर अगर विकास देखना हो, तो कुमकेला ग्राम पंचायत का चक्कर जरूर काटिए। यहाँ विकास इतनी तेजी से 'आधा' हुआ है कि उसे पूरा होने में शायद अगली सदी लग जाए। समाज सेवी लोकनाथ और जागरूक ग्रामीणों ने जब हिम्मत जुटाकर इस 'अधूरे विकास' के काले चिट्ठे (जैसा कि 1011437940.jpg में साफ देखा जा सकता है) को उजागर किया, तो मानों पूरे प्रशासनिक महकमे में सन्नाटा पसर गया।
हैरानी की बात तो यह है कि यह पूरा खेल माननीय मुख्यमंत्री महोदय के अपने क्षेत्र में बिना किसी खौफ के चल रहा है। लेकिन मजाल है कि किसी की कुर्सी हिले!


 12 साल का 'अंगद का पैर' और मलाई-मिठाई का खेल
गाँव वालों का आरोप है कि यहाँ के साहब (सचिव) पिछले 12 सालों से एक ही जगह अंगद का पैर जमाकर बैठे हैं। तबादले के नियम तो शायद सिर्फ आम कर्मचारियों के लिए होते हैं, 'विशेष कृपा' प्राप्त इन साहब के लिए नहीं। ग्रामीणों का तो यहाँ तक कहना है कि मामले को दबाने के लिए 'मलाई और मिठाई' ऊपरी स्तर तक बराबर बांटी जा रही है, तभी तो इतनी शिकायतों के बाद भी साहब को अभेद्य संरक्षण प्राप्त है।
 कागजों पर 'निकासी' पूरी, जमीन पर काम 'अधूरा'! 
संलग्न दस्तावेज 1011437940.jpg को देखकर तो कोई भी नौसिखिया इंजीनियर भी अपना सिर पीट लेगा। सूची में 1 से लेकर 6 तक ऐसे 'अधूरे' कामों की कतार है, जिनकी राशि का आधा या उससे अधिक हिस्सा कब का 'आहरण' (विड्रॉ) किया जा चुका है।
कहीं नाली निर्माण (वर्ष 2020-21) के नाम पर ₹2.50 लाख निकाल लिए गए, पर नाली आज भी पानी का इंतजार कर रही है।
कहीं हैंडपंप खनन तो कहीं चबूतरा निर्माण के नाम पर सिर्फ बजट की 'खुदाई' हुई है, जमीन पर सन्नाटा है।
मजे की बात देखिए, वर्ष 2026-27 के कार्यों (मरघटी तालाब पचरी निर्माण आदि) के नाम पर भी पहले ही निकासी का खेल सेट कर दिया गया है! एडवांस काम का ऐसा एडवांस भ्रष्टाचार शायद ही कहीं देखने को मिले।
 सीएम हेल्पलाइन 'नॉट रीचेबल' या बेअसर?
जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो ग्रामीणों ने 'सीएम हेल्पलाइन नंबर' का दरवाजा खटखटाया। उम्मीद थी कि सूबे के मुखिया के कान तक बात पहुँचेगी तो तत्काल एक्शन होगा। लेकिन अफ़सोस! यहाँ भी 'कार्रवाई की कछुआ चाल' ही देखने को मिल रही है। ऐसा लगता है कि हेल्पलाइन के अधिकारी भी इस मलाईदार मिठाई के स्वाद से सम्मोहित हो चुके हैं।

 बड़ा सवाल: कलेक्टर साहब, आपकी खामोशी का राज क्या है?
जब मुख्यमंत्री के इलाके में इतने बेखौफ अंदाज में जनता के पैसों की होली खेली जा रही हो, तो सवाल सीधे जिले के मुखिया यानी कलेक्टर साहब पर उठता है।

 ग्रामीणों का सीधा सवाल: "कलेक्टर साहब, इस सचिव को ऐसा कौन सा 'सुरक्षा कवच' मिला हुआ है कि 12 साल का कार्यकाल और भ्रष्टाचार की ये लंबी लिस्ट (1011437940.jpg) देखने के बाद भी आपकी फाइलें आगे नहीं सरक रहीं? क्या इसके पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष जांच होगी या फिर मलाई का यह दौर ऐसे ही चलता रहेगा?"

 अब देखना यह है कि इस विवादित और उजागर हो चुके मामले के बाद प्रशासन की नींद टूटती है या फिर कुमकेला के ग्रामीण ऐसे ही 'कागजी विकास' के सहारे अपनी किस्मत को कोसते रहेंगे।


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