डीईओ डांटेंगे… और पापा को पता चला तो घर से निकाल देंगे!”


 जिला जांजगीर चांपा

सेवानिवृत्ति से पहले शिक्षक की सेवापुस्तिका पर बीईओ ने तत्परता से किए हस्ताक्षर, पिता के संस्कार और कर्तव्यनिष्ठा की भावुक मिसाल बनी घटना


बम्हनीडीह। “अगर मेरे डीईओ साहब को पता चलेगा कि मैंने विलंब किया है तो मुझे डांटेंगे… और मेरे पापा को पता चला कि आपकी सेवापुस्तिका पर हस्ताक्षर करने में मैंने तनिक भी देरी की है, तो वे मुझे घर से निकाल देंगे!”


बीईओ बसंत चतुर्वेदी के ये शब्द इन दिनों कर्तव्य, संस्कार और शिक्षक सम्मान की एक प्रेरक मिसाल बन गए हैं।


दरअसल, सेवानिवृत्ति में महज चार महीने शेष रहने पर एक सम्माननीय शिक्षक अपनी सेवापुस्तिका में नॉमिनी, ग्रेच्युटी फॉर्म, समूह बीमा सहित छूटे हुए हस्ताक्षर कराने शनिवार को बीईओ कार्यालय बम्हनीडीह पहुंचे। इसी दौरान शिक्षक ने बीईओ बसंत चतुर्वेदी से आत्मीयता से कहा कि उनके पिता भी इसी बीईओ कार्यालय में पदस्थ रहे हैं और उन्हीं के कार्यकाल में उन्होंने कभी उनका कार्यभार ग्रहण कराया था।


शिक्षक की यह बात सुनते ही बीईओ बसंत चतुर्वेदी मुस्कराए और सेवापुस्तिका में आवश्यक सभी छूटे हुए हस्ताक्षर तत्परता से पूरे कर दिए।


इसी दौरान उन्होंने अपने पिता के संस्कारों को याद करते हुए कहा कि यदि उनके डीईओ को काम में देरी की जानकारी मिली तो वे उन्हें डांटेंगे और अगर उनके पिता को पता चला कि किसी शिक्षक की सेवापुस्तिका पर हस्ताक्षर करने में उन्होंने जरा भी देरी की, तो वे उन्हें घर से निकाल देंगे।


एक हस्ताक्षर, कई संदेश


यह प्रसंग महज सेवापुस्तिका पर किए गए कुछ हस्ताक्षरों तक सीमित नहीं रहा। इसने यह संदेश भी दिया कि शिक्षक की सेवा, उसके अधिकार और सेवानिवृत्ति से जुड़े दस्तावेजों का समय पर संधारण कितना महत्वपूर्ण है।


बीईओ बसंत चतुर्वेदी की तत्परता में जहां प्रशासनिक जिम्मेदारी दिखाई दी, वहीं उनके शब्दों में पिता से मिले कर्तव्यनिष्ठा और सेवा-भाव के संस्कार भी नजर आए।


“मोर सेवापुस्तिका—मोर अधिकार—मोर जिम्मेदारी”


सेवा पुस्तिका को लेकर चलाए जा रहे “मोर सेवापुस्तिका—मोर अधिकार—मोर जिम्मेदारी” अभियान की भावना भी इस प्रसंग में साफ दिखाई दी। शिक्षक के अधिकारों से जुड़े दस्तावेजों को दुरुस्त रखना और आवश्यक कार्य समय पर पूरा करना केवल विभागीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि कर्मचारी के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है।


चार महीने बाद सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक के लिए शनिवार का यह दिन शायद सिर्फ हस्ताक्षर कराने का दिन था, लेकिन बीईओ के शब्दों ने इसे शिक्षक सम्मान, जिम्मेदारी और पारिवारिक संस्कारों की एक यादगार कहानी बना दिया।

पढ़िए EXCLUSIVE खबर — एक सेवापुस्तिका, एक शिक्षक और कर्तव्यनिष्ठा की भावुक कहानी!


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