पत्थलगांव जशपुर: सूत्रों के हवाले तहसील कार्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों स्टाम्प पेपर की भारी किल्लत देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि वेंडर कृत्रिम कमी दिखाकर छोटे मूल्य के स्टाम्प पेपर (जैसे ₹10, ₹20 और ₹50) को दोगुने से अधिक दामों पर बेच रहे हैं।
मुख्य बिंदु:
कालाबाजारी का खेल : ग्रामीणों के अनुसार, ₹50 के स्टाम्प के लिए ₹100 से ₹150 तक वसूले जा रहे हैं। मना करने पर वेंडर स्टॉक खत्म होने का बहाना बना देते हैं।
मौखिक शिकायत : कल कई ग्रामीणों ने इस संबंध में तहसील कार्यालय में मौखिक शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे शपथ पत्र, जमीन सौदे और अन्य सरकारी कामों के लिए दूर-दराज से आते हैं, लेकिन यहां घंटों इंतजार और ज्यादा पैसे देने के बाद भी स्टाम्प नहीं मिल पा रहा है।
मजबूरी का फायदा: गरीब और कम पढ़े-लिखे ग्रामीणों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है। अधिकारियों के पास जाने के डर से वेंडर उन्हें डराते हैं कि शिकायत करने पर काम और अटक जाएगा।
प्रशासन की स्थिति:
स्थानीय प्रशासन और पंजीयन विभाग द्वारा समय-समय पर औचक निरीक्षण की बातें कही जाती हैं, लेकिन धरातल पर वेंडरों का एकाधिकार बरकरार है। नियमानुसार, वेंडरों को अपने स्टॉक का रिकॉर्ड रखना और उसे सार्वजनिक करना अनिवार्य है, लेकिन पत्थलगांव में अधिकांश वेंडर इसे छिपाकर रखते हैं।
ग्रामीणों की मांग:
ई-स्टाम्पिंग (e-Stamping) की प्रक्रिया को और अधिक सरल और सुलभ बनाया जाए ताकि वेंडरों पर निर्भरता कम हो सके।
दोषी स्टाम्प वेंडरों के लाइसेंस रद्द किए जाएं और उन पर कड़ी कार्रवाई हो।
तहसील कार्यालय में स्टाम्प की उपलब्धता की दैनिक रिपोर्ट सार्वजनिक बोर्ड पर लगाई जाए।
ग्रामीण अब इस मामले में लिखित शिकायत और उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की तैयारी कर रहे हैं ताकि उन्हें इस आर्थिक शोषण से मुक्ति मिल सके।
