कोतबा बिजली विभाग की महालापरवाही और सरकारी दावों की पोल खोलती एक बेहद सनसनीखेज और आक्रोशित कर देने वाली खबर

 

कोतबा (छत्तीसगढ़): बिजली विभाग की महालापरवाही और सरकारी दावों की पोल खोलती एक बेहद सनसनीखेज और आक्रोशित कर देने वाली खबर सामने आ रही है। जशपुर जिले के कोतबा वितरण केंद्र (डीसी) के अंतर्गत आने वाले ग्राम खजरी ढाब (फिटिंग पारा) में पिछले दो दिनों से मुख्य ट्रांसफार्मर पूरी तरह से जलकर खाक हो चुका है। पूरा गांव 48 घंटों से भी अधिक समय से घनघोर अंधेरे में डूबा हुआ है। विद्युत मंडल के आला अधिकारियों और कर्मचारियों को इस गंभीर संकट की बार-बार सूचना दी गई है, लेकिन विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। बिजली बाबू और जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं, जबकि ग्रामीण इस भीषण गर्मी में नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।पेयजल संकट से हाहाकार, जनता में भारी उबालगांव में बिजली गुल होने से नल-जल योजना और पानी के सारे पंप ठप पड़ गए हैं। ग्रामीणों के सामने अब बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने की नौबत आ गई है। भीषण पेयजल संकट के कारण महिलाओं और बच्चों को चिलचिलाती धूप में दूर-दराज के कुओं और झिरिया से गंदा पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। गांव के आक्रोशित लोगों का कहना है कि बिजली विभाग केवल हर महीने भारी-भरकम बिल वसूलना जानता है, लेकिन जब सेवा देने की बात आती है, तो अधिकारी फोन उठाना बंद कर देते हैं।"सरकार पूरी तरह फेल" – व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालइस बदहाली को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों ने खुले तौर पर शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि "वर्तमान सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है।" बड़े-बड़े मंचों से 24 घंटे बिजली और विकास के लंबे-चौड़े दावे करने वाले नेताओं के राज में आज ग्रामीण इलाका लालटेन युग में लौट आया है।उग्र आंदोलन की चेतावनीग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ घंटों के भीतर नया ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे कोतबा विद्युत कार्यालय का घेराव करेंगे और चक्काजाम करने को विवश होंगे। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया विद्युत मंडल जागता है या ग्रामीणों का यह आक्रोश किसी बड़े बवाल का रूप लेता है।

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