बड़ी खबर: पत्थलगांव में भू-माफिया का बड़ा खेल! आदिवासियों की पुश्तैनी जमीन को सामान्य बताकर बेचने का आरोप

पत्थलगांव (जशपुर)।

जशपुर जिले के पत्थलगांव से एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ आदिवासियों की पुश्तैनी जमीन को कथित रूप से फर्जीवाड़ा करके सामान्य (गैर-आदिवासी) घोषित करने और उसे बेचने का एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। इस मामले में पीड़ित पक्ष ने अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) पत्थलगांव के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

📍 मुख्य विवाद क्या है?

शिकायत के अनुसार, ग्राम पत्थलगांव और चिडरापारा स्थित खसरा नंबर 333/1 (रकबा 2.60 एकड़) की पुश्तैनी आदिवासी भूमि को भू-माफियाओं द्वारा राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और पटवारी से मिलीभगत करके सामान्य भूमि के रूप में प्रदर्शित किया गया। इसके बाद इस कीमती जमीन को फर्जी तरीके से बेचने (विक्रय करने) का आरोप लगाया गया है।

👥 किनके खिलाफ हुई शिकायत?

आवेदन में सीधे तौर पर भू-माफिया और मिलीभगत करने वाले सरकारी अमले को निशाना बनाया गया है:

मुख्य आरोपी: सुरेश कुमार यादव, लुकेश्वर यादव और अविनाश न्यू काउंटी (सेक्टर 30, नया रायपुर)।

राजस्व अधिकारी/कर्मचारी: पूर्व तहसीलदार उमा सिंह, पटवारी भुइयां शाखा के ऑपरेटर मनोज लकड़ा, और तत्कालीन एसडीएम (SDM)।

आरोप: इन सभी पर आपसी सांठगांठ, धोखाधड़ी और रिकॉर्ड में हेरफेर कर आदिवासी हक मारने का आरोप है।

📜 जमीन का पुराना इतिहास और गड़बड़ी का खेल

पीड़ित पक्ष ने दस्तावेज़ों के हवाले से बताया है कि:

1958 की रजिस्ट्री: यह जमीन मूल रूप से वर्ष 20.04.1958 को विधिवत रजिस्ट्री बैनामा के माध्यम से आदिवासियों (लुईस आत्मज जोहन चन्द लकड़ा) द्वारा खरीदी और कास्त की जा रही थी।

रिकॉर्ड से नाम गायब करना: आरोप है कि बाद में राजस्व रिकॉर्ड से मूल आदिवासी वारिसानों के नाम दुर्भावनापूर्वक विलोपित कर दिए गए। केवल 'लुईस' नाम दर्ज रहने का फायदा उठाकर, उसे गैर-आदिवासी (पिछड़ा वर्ग) दर्शा दिया गया।

फर्जी नामांतरण: छ.ग. भू-राजस्व संहिता 1959 लागू होने से पहले के रिकॉर्ड्स का हवाला देकर, त्रुटिवश छूटे नामों का फायदा उठाया गया और जमीन को सामान्य बताकर हड़पने की साजिश रची गई।

🔍 पुलिस और प्रशासन की भूमिका

इस शिकायती पत्र पर थाना पत्थलगांव और एसडीएम कार्यालय की आधिकारिक सील और 'Received' (प्राप्त) के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि मामला अब आधिकारिक तौर पर प्रशासन के पास पहुंच चुका है। पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।






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