रायगढ़, छत्तीसगढ़: भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' के दावों के बीच छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिले के लैलूंगा तहसील में भू-माफियाओं और राजस्व अधिकारियों (पटवारी, आर.आई., और तहसीलदार) के संगठित 'नेक्सस' द्वारा भारी रिश्वत लेकर किसानों की पुश्तैनी जमीन हड़पने का सनसनीखेज आरोप लगा है। स्थानीय सिस्टम की अकर्मण्यता से निराश होकर अब पीड़ितों ने सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का दरवाजा खटखटाया है।
क्या है पूरा मामला? - ग्राम राजपुर (तहसील लैलूंगा) के निवासी प्रार्थी जशवंत बेहरा और आलोक रंजन बेहरा ने खसरा नंबर 575/1 और 575/2 की अपनी वैध भूमि को लेकर यह गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर एक आपराधिक गिरोह (Syndicate) बना लिया है, जिनका एकमात्र उद्देश्य रिश्वतखोरी के दम पर आम नागरिकों और किसानों की संपत्तियों को अवैध रूप से हड़पना है।
इन अधिकारियों पर लगे हैं संगीन आरोप
शिकायत पत्र में सीधे तौर पर निम्नलिखित अधिकारियों को नामजद कर गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
* पटवारी: मनीष सिदार
* राजस्व निरीक्षक (R.I.): सुलेमान बेक
* तहसीलदार: उज्जवल पाण्डे
पीड़ितों का आरोप है कि इन अधिकारियों ने कानून और संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए, भारी वित्तीय प्रलोभन (रिश्वत) के लालच में सरकारी रिकॉर्ड और राजस्व दस्तावेजों में कूट रचना (Forgery) की है। सीमांकन के दौरान हेराफेरी कर पुश्तैनी जमीन को दूसरों के नाम करने का आपराधिक षड्यंत्र रचा गया है।
स्थानीय प्रशासन की 'चुप्पी' पर उठे सवाल
स्पष्ट फर्जीवाड़े और दस्तावेजी साक्ष्यों के बावजूद स्थानीय प्रशासन ने अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्यवाही नहीं की है। पीड़ितों ने अपने पत्र में तीखा प्रहार करते हुए लिखा है कि, "जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम नागरिक न्याय के लिए कहाँ जाए?" अधिकारियों की यह चुप्पी दर्शाती है कि पूरा स्थानीय सिस्टम इस भ्रष्टाचार में लिप्त है और दोषियों को संरक्षण दे रहा है।
प्रधानमंत्री और उच्चाधिकारियों से की गई
प्रमुख मांगें: पीड़ितों ने 25 जून 2026 को भारतीय डाक के माध्यम से पीएमओ (नई दिल्ली), कलेक्टर रायगढ़ और थाना प्रभारी को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है, जिसकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
* तत्काल FIR: मुख्य सचिव और DGP के माध्यम से उक्त भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग की तत्काल FIR दर्ज की जाए।
* EOW से जांच: इन अधिकारियों की आय से अधिक संपत्ति और भू-माफियाओं के साथ इनके संदेहास्पद संबंधों की राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) या किसी केंद्रीय एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
* दस्तावेज बहाली: इस फर्जीवाड़े को शून्य घोषित कर मूल राजस्व दस्तावेजों को तत्काल बहाल करने का सख्त आदेश दिया जाए।
* सुरक्षा की गुहार: प्रार्थीगणों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु स्थानीय पुलिस अधीक्षक (SP) को पाबंद किया जाए।
यह कृत्य न केवल भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी और कूट रचना का अपराध है, बल्कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का भी खुला उल्लंघन है। अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के संज्ञान में मामला आने के बाद क्या इन 'सफेदपोश' अधिकारियों पर गाज गिरेगी या फिर फाइलों में यह महाघोटाला भी दबकर रह जाएगा?
