पत्थलगांव/जशपुर। जिला जशपुर के पत्थलगांव से संविदा और अनुकंपा नियुक्तियों के नाम पर ऐसा 'भूतिया खेल' सामने आया है, जिसे देखकर अच्छे-अच्छे कानूनविदों का दिमाग चकरा जाए। नियम-कायदों की ऐसी अर्थी उठाई गई है कि जशपुर कलेक्टोरेट के गलियारों से अब सिर्फ भ्रष्टाचार की बदबू आ रही है। योग्य बेरोजगार बेचारे डिग्रियां लेकर भटक रहे हैं, और पत्थलगांव में रसूखदारों के घर नियमों का मर्डर करके नौकरियां बांटी जा रही हैं।
नियमों का मर्डरः जब 'क्लास-1' भाई बैठा है, तो रविंदर निषाद को अनुकंपा कैसे मिली, बाबू ?
पूरा मामला सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाने का लाइव उदाहरण है। नियम साफ कहता है कि यदि शासकीय सेवक के आश्रितों में से कोई भी सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, तो परिवार के किसी अन्य सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल सकती।
लेकिन पत्थलगांव के इस 'चमत्कारी' मामले को देखिएः
बड़ा भाईः पहले से ही सरकार का 'ग्रेट-ए' (क्लास-1) अधिकारी बनकर मलाई काट रहा है।
पिताजीः सरकारी शिक्षक थे, जिनके निधन के बाद अनुकंपा का खेल रचा गया।
छोटे भाई 'रविंदर निषाद'ः बड़े भाई के बड़े सरकारी अधिकारी होने के बावजूद, ये महाशय कसम खाकर कलेक्टोरेट पहुंच गए कि साहब, मेरे घर में तो कोई कमाने वाला ही नहीं है, हम भूखों मर रहे हैं!
हद तो तब हो गई जब रविंदर निषाद ने बकायदा स्टांप पेपर (हलफनामे) पर यह सफेद झूठ लिखकर दे दिया कि परिवार में कोई भी नौकरी पेशा नहीं है। और धन्य है हमारा जशपुर का अंधा प्रशासनिक अमला, जिसने
बिना वेरिफिकेशन किए रविंदर निषाद के नाम पर हरी झंडी दिखा दी। वाह साहब वाह! आँखें बंद करके फाइल पर दस्तखत करने की यह कला सिर्फ जशपुर कलेक्टोरेट में ही देखने को मिल सकती है।
कलेक्टर साहब का 'गांधारी' मोड और 'मलाई-मिठाई' का सस्पेंस
इस पूरे खेल में सबसे रहस्यमयी भूमिका हमारे 'कलेक्टर महोदय' की है। पत्थलगांव और पूरे जिले के योग्य और असल हकदार बेरोजगार युवा कड़कड़ाती धूप में भटक रहे हैं, और कलेक्टोरेट में रविंदर निषाद जैसों को 'अनुकंपा' की मलाई परोसी जा रही है। जनता चीख चीखकर थक गई, लेकिन प्रशासन ने कानों में
फेविक्विक डाल रखा है।
जनता का सीधा सवालः आखिर इस अंधेपन का राज क्या है? क्या जशपुर के साहब के पास भी पत्थलगांव से शुद्ध देसी घी की बनी 'मलाई-मिठाई' के वो जादुई डब्बे पहुंच चुके हैं, जो बड़े से बड़े फजीर्वाड़े और कानून की धाराओं को हजम कर जाते हैं? क्या इस बार भी जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती की जाएगी? सबूतों का 'एटम बम' तैयार... अब देखना है 'कार्रवाई' या
'कलेक्टर का वीटो' !
पत्थलगांव और जशपुर के जागरूक नागरिकों का सब्र अब टूट चुका है। बहुत जल्द जशपुर कलेक्टर की टेबल पर रविंदर निषाद के इस फजीर्वाड़े के पुख्ता सबूत, स्टांप पेपर की कॉपी और दोनों भाइयों की जन्म-कुंडली का 'एटम बम' फोड़ा
जाने वाला है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जब ये सारे अकाट्य सबूत साहब के सामने टेबल पर होंगे, तबः
क्या कूटरचना और धोखाधड़ी करने वाले आरोपी रविंदर निषाद और उसके क्लास-1 अफसर भाई पर 420 का केस दर्ज कर जेल भेजा जाएगा? क्या गलत तरीके से ली गई सरकारी सैलरी की रिकवरी होगी ?
या फिर, साहब एक बार फिर 'फाइल दबाकर' जनता को बता देंगे कि जशपुर में न्याय सिर्फ उनके लिए है जिनके पास 'पैसा, झूठ और रसूख' है?
जशपुर के बेरोजगार युवाओं, अगर नौकरी चाहिए तो पढ़ना-लिखना छोड़ो, झूठ बोलने का कोई शॉर्टकट कोर्स कर लो, क्योंकि यहाँ योग्यता नहीं, 'स्टांप पेपर पर झूठ' और 'रविंदर निषाद' जैसा टैलेंट होना जरूरी है !
