महा-ब्रेकिंग: मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही उड़ी उनके आदेशों की धज्जियां! शिक्षा विभाग में 'अटैचमेंट' का काला खेल, आखिर किसका वरदहस्त?


जशपुर / पत्थलगांव:

छत्तीसगढ़ में सुशासन का दावा करने वाली सरकार के कड़े आदेशों को खुद उनके ही अधिकारी और कर्मचारी किस तरह ठेंगा दिखा रहे हैं, इसका एक ज्वलंत उदाहरण मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर के पत्थलगांव से सामने आया है। पूरे प्रदेश में जहां एक ओर संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को पूरी तरह समाप्त करने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं पत्थलगांव शिक्षा विभाग में बैठे 'रसूखदार' कर्मचारी और शिक्षक आज भी मलाईदार पदों पर अटैच होकर जमे हुए हैं।

लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी आधिकारिक पत्र "1011576641.jpg" (पत्र क्र./एम.आई.एस./N-123/445, दिनांक 25.06.2026) में साफ तौर पर निर्देश दिया गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में माननीय मंत्री जी के निर्देशानुसार सभी संलग्न कर्मचारियों और शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से उनकी मूल पदस्थापना संस्था हेतु कार्यमुक्त किया जाए। लेकिन पत्थलगांव में इस सरकारी आदेश की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

प्राचार्यों की 'रहस्यमयी' चुप्पी, क्या है सांठगांठ का खेल?

सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, पत्थलगांव के कई स्कूलों के शिक्षक और व्याख्याता लंबे समय से संलग्नीकरण के तहत दूसरी जगहों पर ऐश काट रहे हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि जिन स्कूलों से ये शिक्षक नदारद हैं, वहां के प्राचार्य भी 'हाथ पर हाथ धरे' तमाशा देख रहे हैं। आखिर इन प्राचार्यों की क्या मजबूरी है? क्या इस पूरे खेल में ऊपर से लेकर नीचे तक कोई बड़ा लेन-देन या सांठगांठ चल रही है, जिसके कारण रसूखदार शिक्षकों पर कार्रवाई करने से विभाग के हाथ कांप रहे हैं?

मुख्य बिंदु: जो व्यवस्था पर खड़े करते हैं बड़े सवाल

 आदेश को पैरों तले रौंदा: लोक शिक्षण संचालनालय के पत्र "1011576641.jpg" के तहत साफ तौर पर कार्यमुक्त किए गए कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन पत्थलगांव में अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

 बच्चों के भविष्य से खिलवाड़: मूल शालाओं से व्याख्याताओं और शिक्षकों के गायब रहने के कारण गरीब बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है।

 मुख्यमंत्री के नाम पर बट्टा: मुख्यमंत्री के अपने ही क्षेत्र में उनके और शिक्षा मंत्री के आदेशों को इस तरह हवा में उड़ाना स्थानीय प्रशासन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

बड़ा सवाल: जब प्रदेश के मुखिया और शिक्षा मंत्री का आदेश ही सुरक्षित नहीं है, तो फिर इस व्यवस्था को क्या कहा जाए? क्या पत्थलगांव के इन 'अटैच' गुरुजियों के रसूख के आगे शासन नतमस्तक हो चुका है या फिर आने वाले दिनों में इन पर कोई गाज गिरेगी? यह देखने वाली बात होगी।



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