जशपुर / पत्थलगांव (छत्तीसगढ़):
शासकीय सेवाओं में अनुकंपा नियुक्ति का सपना देखने वाले हजारों योग्य उम्मीदवारों की उम्मीदों पर उस वक्त पानी फिरता दिखता है, जब 'जुगाड़' और 'फर्जीवाड़े' के खेल के मामले सामने आते हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला जशपुर जिले से सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है!
💥 मामला क्या है?
पत्थलगांव निवासी श्री अजीत गुप्ता ने सबूतों के साथ कलेक्टर कार्यालय जशपुर में शिकायत दर्ज कराई है (आवेदन दिनांक 09/07/2026)। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रविंदर निषाद (निवासी पत्थलगांव) ने:
तथ्य छिपाकर और फर्जी शपथ पत्र (हलफनामा) तैयार करवाकर शासकीय सेवा में अवैध रूप से अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त की है।
शासन के साथ सीधी धोखाधड़ी कर पद हासिल किया है।
शिकायतकर्ता ने न केवल अनुकंपा नियुक्ति को अवैध बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है, बल्कि आरोपी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की भी गुहार लगाई है।
📄 प्रशासन में हड़कंप: 7 दिन का अल्टीमेटम!
कलेक्टर कार्यालय जशपुर ने इस शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया है। डिप्टी कलेक्टर (वास्ते-कलेक्टर) हरिओम द्विवेदी के डिजिटल हस्ताक्षर से दो अलग-अलग विभागों को समय-सीमा (Time Limit) के तहत जांच के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं:
स्थापना शाखा को निर्देश (पत्र दिनांक 20/07/2026): प्रभारी अधिकारी, स्थापना शाखा, जिला कार्यालय जशपुर को शिकायत पत्र भेजकर नियमानुसार तुरंत कार्रवाई कर 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को निर्देश (पत्र दिनांक 21/07/2026): जिला शिक्षा अधिकारी, जशपुर को भी प्रति भेजकर इस पूरे फर्जीवाड़े पर नियमानुसार कार्रवाई करने और 7 दिवस के भीतर शिकायतकर्ता व कलेक्टोरेट को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
🎯 व्यंग्य बाण: "कागजों का जादू और हलफनामे का खेल"
बलिहारी है ऐसे 'हुनरमंदों' की, जो बिना योग्यता केवल कागजों के 'कलाकारी' से सरकारी नौकरी अपनी जेब में रख लेते हैं! अब देखना यह होगा कि क्या 7 दिनों में वाकई कार्रवाई का चाबुक चलेगा या फिर कागजी घोड़ों की तरह यह जांच भी फाइलों के ढेर में कहीं गुम हो जाएगी?
अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल प्रशासन के मुंह पर तमाचा होगा, बल्कि उन तमाम बेरोजगारों का भी अपमान होगा जो सालों-साल ईमानदारी से मेहनत करते हैं।
🔍 अब सबकी निगाहें जांच पर!
कलेक्टर महोदय की समय-सीमा सूची में दर्ज इस मामले से अब हड़कंप मचा हुआ है। क्या शिक्षा विभाग और स्थापना शाखा 7 दिनों के भीतर फर्जीवाड़े की परतें खोलकर आरोपी को बाहर का रास्ता दिखाएगी, या जांच के नाम पर लीपापोती होगी? यह देखना दिलचस्प होगा!
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