जशपुर (छत्तीसगढ़) |
शिक्षा विभाग में "जब मन किया आए, जब मन किया गायब हो गए" वाली पुरानी आदत अब महंगी पड़ने लगी है। जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड से एक ऐसा ही ताजा मामला सामने आया है, जहाँ मैडम जी ने बिना अर्जी, बिना मर्जी... सीधे 17 दिनों के लिए स्कूल से 'अदृश्य' होने का अनोखा कारनामा कर दिखाया!
अब साहब, विभाग भी कहाँ चुप बैठने वाला था? जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने ऐसा 'लेटर बम' फोड़ा है कि मैडम जी की सीधे सस्पेंशन (निलंबन) की लैंडिंग हो गई है!
🚨 क्या है पूरा माजरा?
शासकीय प्राथमिक शाला बटुराबहार (विकासखंड पत्थलगांव) में पदस्थ सहायक शिक्षक श्रीमती बिरतिला बरवा को शायद लगा होगा कि "कौन देखने वाला है!"
24 जून 2026 से 10 जुलाई 2026 तक मैडम जी बिना किसी पूर्व सूचना, बिना किसी आवेदन पत्र या बिना अवकाश स्वीकृत कराए 'अनाधिकृत' रूप से नदारद रहीं।
जब बीईओ (BEO) साहब ने 13 जुलाई को "कारण बताओ नोटिस" थमाया, तो मैडम जी ने उसे भी ठेंगा दिखा दिया! न तो कोई जवाब दिया और न ही स्कूल में हाजिरी लगाई।
"न नोटिस का डर, न अफसर की फिक्र... मैडम जी तो अपनी ही धुन में मगन थीं!"
⚖️ कड़ा एक्शन: 'आचरण नियम' तोड़ने की मिली सजा
उच्च अधिकारियों के आदेशों की धज्जियां उड़ाना और छ.ग. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 03 का उल्लंघन करना मैडम जी को भारी पड़ गया। इसे घोर कदाचरण मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी, जशपुर ने 24 जुलाई 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबन का फरमान जारी कर दिया।
निलंबन आदेश के मुख्य बिंदु:
निलंबित पद: श्रीमती बिरतिला बरवा, सहायक शिक्षक।
तत्काल प्रभाव: अब मैडम जी स्कूल में नहीं, बल्कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय (पत्थलगांव) में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी (मुख्यालय नियत)।
जीवन निर्वाह भत्ता: निलंबन की इस 'विश्राम अवधि' में नियम अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
📢 : "अर्जी नहीं, सीधे छुट्टी!"
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की 'लापता' होने की कला कोई नई नहीं है, लेकिन जशपुर DEO के इस रुख ने साफ कर दिया है कि "नो वर्क, नो पे... और अब तो नो जॉब (कुछ दिन के लिए)!"
अब देखना यह होगा कि इस 'गाज' के बाद विभाग के बाकी 'छुट्टी-प्रेमी' गुरुजी सबक लेते हैं या फिर से किसी नए नोटिस का इंतजार करते हैं!

