मंदिर या मयखाना? बगडोल पंचायत भवन बना अय्याशी का अड्डा, शिकायतों पर पर्दा डालने में जुटे 'लापरवाह' सचिव!

बगीचा/जशपुर:

"पंचायत तो लोकतंत्र का मंदिर होती है"—यह पंक्तियाँ किताबों में ही अच्छी लगती हैं, क्योंकि जशपुर जिले के विकासखंड बगीचा अंतर्गत ग्राम पंचायत बगडोल में इस 'मंदिर' की देवतुल्य मर्यादा को शराब की बोतलों और मुर्गों की टांगों तले रौंद दिया गया है।

ग्राम पंचायत बगडोल इन दिनों अपनी किसी जनहितकारी योजना या विकास कार्य के लिए नहीं, बल्कि पंचायत भवन के भीतर चल रहे "दारू-मुर्गा पार्टी" के वायरल वीडियो को लेकर मीडिया की सुर्खियों में है। वायरल वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि कैसे कुछ असमाजिक और आपत्तिजनक तत्व पंचायत भवन को सरकारी दफ़्तर कम, और अपना निजी मयखाना (अड्डा) ज़्यादा समझ रहे हैं।

मामला रफा-दफा करो'...सचिव महोदय का महा-ज्ञान

जब ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा और उन्होंने इस अय्याशी का विरोध करते हुए पंचायत सचिव सुदर्शन दास मानिकपुरी से लिखित और मौखिक शिकायत की, तो उम्मीद थी कि साहेब कड़ा एक्शन लेंगे। लेकिन वाह रे प्रशासनिक निष्ठा! सचिव महोदय का एक और वीडियो वायरल हो गया, जिसमें वे ग्रामीणों को मामले पर कार्रवाई करने के बजाय "मामले को यहीं खत्म करो और दबा दो" की सलाह देते नजर आ रहे हैं।

ऐसा लगता है कि सचिव सुदर्शन दास मानिकपुरी ने भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' का नया अर्थ निकाल लिया है—गड़बड़ी देखो, वीडियो बनाओ और फिर रफा-दफा कर दो!

सरपंच मौन, व्यवस्था लाचार

इस पूरे ड्रामे के बीच गांव की प्रथम नागरिक, सरपंच कौशल्या बाई की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या जनप्रतिनिधि और पंचायत प्रशासन की शह के बिना सरकारी भवन में दिन-दहाड़े मयफ़िलें सज सकती हैं? ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जगह पर गांव के विकास की रूपरेखा बननी चाहिए थी, वहां बोतलें छलक रही हैं और जब जनता जवाब मांगती है तो उन्हें चुप रहने का फरमान सुनाया जाता है।

अब कलेक्टर जशपुर के 'हथौड़े' का इंतजार!

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पूरा बगडोल गांव आक्रोशित है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि पंचायत की पावन भूमि को अय्याशी का अड्डा बनाने वाले अराजक तत्वों और मामले को दबाने वाले सचिव पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अब गेंद जशपुर कलेक्टर के पाले में है। 

देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का स्वतः संज्ञान लेकर शराबी गिरोह और 'रफा-दफा विशेषज्ञ' सचिव पर प्रशासनिक चाबुक चलाता है, या फिर यह फाइल भी सचिव की सलाह की तरह किसी कोने में 'रफा-दफा' होकर धूल खाएगी!

वीडियो क्लिप देखे जरूर 

https://youtu.be/gBvzJTRiKWI

https://youtu.be/cPk6Hp70EKA


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