बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में कानून व्यवस्था और पुलिसिया इकबाल को खुली चुनौती देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सड़क पर बेतरतीब ढंग से खड़ी गाड़ी को हटाने की गुजारिश करने पर एक युवक पर जानलेवा हमला कर दिया गया। आरोपियों ने न केवल बीच सड़क पर मारपीट कर चाकू से वार किया, बल्कि यह धमकी भी दी कि "सरकार में ऊंची पहुंच है, पुलिस को जेब में रखता हूं।"
हैरान करने वाली बात यह है कि सिविल लाइन पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं समेत आर्म्स एक्ट (हथियार अधिनियम) के तहत अपराध दर्ज करने के बावजूद मुख्य आरोपी को सक्षम न्यायालय में पेश करने के बजाय थाने से ही निजी मुचलके (PR Bond) पर रिहा कर दिया। इस कथित ‘थाना स्तरीय राहत’ के बाद खाकी की निष्पक्षता और कानून के इकबाल पर तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं।
*दोपहर में विवाद, रात को रेकी कर जानलेवा घेराबंदी -*पीड़ित सत्यम सिंह (27 वर्ष), निवासी 27 खोली इंद्रसेननगर, द्वारा दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के अनुसार घटना 17 अगस्त की है। दोपहर करीब 12:30 बजे सत्यम अपने निजी कार्य से जिला न्यायालय जा रहे थे। रास्ते में शिव मंदिर के पास एक सफेद रंग की XUV-700 सड़क पर गलत तरीके से खड़ी थी, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो रहा था।
सत्यम ने जब वाहन चालक से गाड़ी किनारे करने का आग्रह किया, तो चालक भड़क उठा और गाली-गलौज करते हुए 'देख लेने' की खुली धमकी देकर वहां से निकल गया। विवाद टालने के लिए सत्यम वहां से सीधे कोर्ट चले गए और अपना काम पूरा करने के बाद जांजगीर स्थित नहरिया बाबा मंदिर दर्शन करने चले गए।
शिकायत के मुताबिक, रात करीब 8:30 बजे जब वे जांजगीर से लौटकर 27 खोली चौक के पास पहुंचे, तभी सफेद रंग की एक्टिवा पर सवार कुछ युवकों ने सुनियोजित तरीके से उनका पीछा कर रास्ता रोक लिया।
बेरहमी से पिटाई के बाद चाकू से हमला
सड़क पर घेराबंदी करते ही हमलावरों ने सत्यम के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। सत्यम जब तक कुछ समझ पाते, आरोपियों ने हाथ, मुक्कों और लातों से उन्हें बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। जब सत्यम ने खुद को बचाने का प्रयास किया, तो आरोपियों में से एक ने पैंट की जेब से धारदार चाकू निकाला और जान से मारने की नियत से उनके शरीर पर वार कर दिए।
मारपीट और हमले के दौरान हमलावर एक-दूसरे का नाम पुकार रहे थे। इसी दौरान पीड़ित को पता चला कि दोपहर में कार हटाने को लेकर विवाद करने वाला व्यक्ति ही इस हमले की अगुवाई कर रहा था। हमलावरों की पहचान 27 खोली नंदकिशोर विहार निवासी विकास सिंह ठाकुर, उसके सहयोगी बोदकू सिंह और एक अन्य अज्ञात साथी के रूप में हुई।
‘जो करना है कर लो, पुलिस मेरी जेब में है’
वारदात को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी विकास सिंह ठाकुर ने सरेराह धौंस जमाते हुए कहा कि उसकी सत्ताधारी रसूखदारों में सीधी पहुंच है।
*पीड़ित के मुताबिक, आरोपी ने ललकारते हुए कहा :*
“तू मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। शासन में ऊंची पकड़ है और पुलिस को मैं अपनी जेब में रखता हूं।”
* इस धमकी के बाद लहूलुहान हालत में सत्यम सिविल लाइन थाने पहुंचे और आपबीती दर्ज कराई।
*कानूनी पेच: आर्म्स एक्ट लगने के बाद थाने से बेल कैसे?*सिविल लाइन पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए विकास सिंह ठाकुर, बोदकू सिंह और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 126(2) (गलत तरीके से रोकना), 296 (अश्लील कृत्य/गाली-गलौज), 3(5) (समान आशय से किया गया अपराध) और चाकूबाजी के कारण आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
*कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक :*न्यायालय में पेशी का नियम: जब किसी मामले में धारदार हथियार (जैसे चाकू) के इस्तेमाल की पुष्टि होती है और आर्म्स एक्ट जोड़ा जाता है, तो पुलिस का पहला कर्तव्य हथियार की विधिवत बरामदगी (जब्ती पंचनामा) करना और आरोपी को न्यायिक रिमांड हेतु मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना होता है।
थाने से मुचलके पर विवाद: इस तरह के आदतन व हिंसक मामलों में थाने से ही जमानत दे दिया जाना विधिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। जानकारों का कहना है कि यदि धाराओं में सजा की अवधि 7 वर्ष से कम होने के आधार पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के नोटिस प्रावधानों का सहारा लिया गया, तब भी हथियार की जब्ती और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका के तहत कोर्ट में पेशी अनिवार्य मानी जाती है।
* जांच के घेरे में पुलिस, जनता में अविश्वास
* रसूख के दम पर मिली इस कथित राहत ने पीड़ित परिवार को गहरे खौफ में डाल दिया है। मोहल्ले और शहर के लोगों में यह संदेश जा रहा है कि दबंग व्यक्ति खुलेआम चाकूबाजी करने के बाद भी कानून के शिकंजे से आसानी से बच सकते हैं।
* अब पूरा मामला सिर्फ दो पक्षों के विवाद का नहीं रह गया है, बल्कि जांच का केंद्र यह बन चुका है कि:
* क्या आरोपी का "पुलिस जेब में है" वाला दावा सच साबित हो रहा है?
* क्या हमले में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद कर लिया गया है, या फिर यह कार्रवाई केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित थी?
* आर्म्स एक्ट जैसी संगीन धारा दर्ज होने के बावजूद किस पुलिस अधिकारी के निर्देश पर आरोपी को थाने से निजी मुचलके पर रिहा किया गया?
शहर की जनता और पीड़ित पक्ष अब बिलासपुर पुलिस अधीक्षक (SP) और वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले में निष्पक्ष हस्तक्षेप, आरोपी की त्वरित गिरफ्तारी और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की आंतरिक जांच की मांग कर रहे हैं।


