सरगुजा/नवा रायपुर:
शिक्षा के मंदिर में बच्चों को "पर्यावरण बचाओ" का पाठ पढ़ाया जाता है, लेकिन सरगुजा जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय बतोली की प्राचार्या श्रीमती प्रसन्ना केरकेट्टा ने इस पाठ को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया! मैडम ने सोचा—"किताबों में पेड़ बचाने से क्या होगा, असली फायदा तो पेड़ काटने और बेचने में है!"
छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक आदेश पत्र के अनुसार, मैडम जी पर अनुमति से अधिक पेड़ काटने, उन्हें गैर-कानूनी तरीके से ढोने (परिवहन) और बेचने का सनसनीखेज आरोप लगा है। इतना ही नहीं, पेड़ों को बेचकर जो 'मलाई' यानी राशि मिली, उसे सरकारी खजाने में जमा कराने के बजाय मैडम जी गटक गईं!
नियम-कानून ताक पर, जेब गरम!
सरकारी आदेश में साफ लिखा है कि प्राचार्या का यह 'पेड़-काटो, जेब- भरो' अभियान घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के चिथड़े उड़ाने के जुर्म में शासन ने मैडम जी को 'तत्काल प्रभाव से सस्पेंड' कर दिया है। अब निलंबन काल में उनका नया ठिकाना होगा—संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा), सरगुजा (अम्बिकापुर) का दफ्तर।
व्यंग्य के तीखे तीर:
* नया सब्जेक्ट: क्या स्वामी आत्मानंद स्कूल में अब "पेड़ कटाई एवं व्यावहारिक व्यापार कला" नाम का नया विषय शुरू होने वाला था?
* सावधानी का इनाम: मैडम ने सोचा होगा कि बच्चे तो सिर्फ ऑक्सीजन लेते हैं, लेकिन लकड़ी बेचने से तो सीधा 'कैश' मिलता है!
फिलहाल शासन ने मैडम जी को घर बैठाकर (निलंबित करके) केवल 'जीवन निर्वाह भत्ता' देने का फैसला किया है। अब देखना यह है कि जांच के बाद मैडम जी इस 'लकड़ी कांड' से कैसे बाहर निकलती हैं!

