*वाह रे 'सुशासन'! जहाँ एम्बुलेंस की धड़कनें रुकीं, अस्पताल डेढ़ साल से ताले में, और मंत्री जी के दौरों में सिस्टम मस्त!*

 

जशपुर: –छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो हमारे चमकते-दमकते स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की धज्जियाँ उड़ाने के लिए काफी है। जशपुर के मेहनई में एक पहाड़ी कोरवा गर्भवती महिला की एम्बुलेंस खराब होने के कारण मौत ने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।

जरा विडंबना देखिए कि जिस जशपुर से मुख्यमंत्री आते हैं, जिस दिन जशपुर में स्वास्थ्य मंत्री का दौरा होता है, ठीक उसी जशपुर विधानसभा के मेहनई का अस्पताल पिछले डेढ़ साल से ताले में बंद मिलता है!

'हम जिम्मेदार नहीं, कंपनी जिम्मेदार है!' – BMO साहब का अनोखा गॉडफादर राग

जब इस गंभीर लापरवाही पर जिम्मेदारों से सवाल किया गया, तो ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) महोदय ने पल्ला झाड़ने में जरा भी देर नहीं लगाई। उनका रटा-रयाया जवाब था— "हम जिम्मेदार नहीं, कंपनी जिम्मेदार है!"

वाह रे प्रशासनिक जिम्मेदारी! मतलब साफ है कि मरीज की जान जाए तो जाए, ठेकेदार और कंपनी की जेब सुरक्षित रहनी चाहिए। अगर एम्बुलेंस बनाने वाली या चलाने वाली कंपनी ही सब तय करेगी, तो जनता अपना इलाज करवाने अस्पताल जाए या सीधे उस निजी कंपनी के दफ़्तर?

तो फिर जनता किससे सवाल करे?

जिला कांग्रेस कमेटी, जशपुर के महामंत्री मनमोहन भगत ने तीखा सवाल उठाया है कि जब वीआईपी दौरों के शोर में गरीबों की चीखें दब जाती हैं और अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए ठीकरा कंपनियों पर फोड़ देते हैं, तो लाचार जनता आखिर न्याय और इलाज के लिए किससे गुहार लगाए?

यह घटना सिर्फ एक गर्भवती महिला की मौत नहीं है, बल्कि उस खोखले 'सुशासन' के मुँह पर तमाचा है, जहाँ मंत्री जी के स्वागत के लिए लाल कालीन बिछाई जाती है और मरीजों के लिए सिर्फ खराब एम्बुलेंस और ताले लगे अस्पताल नसीब होते हैं।

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