*धर्मजयगढ़।* क्या कानून के रखवाले ही अब अपराधियों के 'रक्षक' बन गए हैं? रायगढ़ जिले के ग्रामीण अंचल से एक ऐसी शर्मनाक खबर सामने आई है जिसने पुलिसिया तंत्र की निष्पक्षता पर गहरा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। आरोप है कि ग्रामीणों ने जिन शातिर लुटेरे को अपनी जान जोखिम में डालकर रंगे हाथों दबोचा था, उन्हें पुलिस ने एक 'बड़ी डील' के चक्कर में बिना किसी कानूनी कार्रवाई के रातों-रात रिहा कर दिया।
*बेजुबानों पर जुल्म : मुंह पर टेप और पैरों में बेड़ियाँ -* वारदात की रात लुटेरों के एक संगठित गिरोह ने एक गरीब परिवार के आशियाने पर धावा बोला। इन लुटेरों की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने चोरी किए गए मवेशियों की आवाज दबाने के लिए उनके मुंह पर इंडस्ट्रियल टेप चिपका दिए और उनके पैरों को रस्सियों से बेरहमी से जकड़ दिया। इन बेजुबानों को एक गाड़ी में ठूंसकर भागने की कोशिश की जा रही थी।
*ग्रामीणों का पराक्रम, सिस्टम की गद्दारी! -* भागते समय लुटेरों की गाड़ी एक गहरे गड्ढे में फंस गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने घेराबंदी कर गिरोह को पकड़ लिया। रंगे हाथों पकड़े गए अपराधी, मौके पर मौजूद गाड़ी और तड़पते हुए बेजुबान - इंसाफ के लिए सारे सबूत मौजूद थे। ग्रामीणों ने पूरी मुस्तैदी के साथ आरोपी को पुलिस के हवाले किया। लेकिन असली 'खेल' थाने की चारदीवारी के भीतर शुरू हुआ।
https://youtube.com/shorts/N9zOz528V70?si=nj-FSJfEBYUvXcO_
Link को सलेक्ट कर ओपन करे और पूरा वीडियो देखे
*'गुप्त डील' और इंसाफ का कत्ल! -* थाने पहुंचने के बाद ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के बजाय उनके साथ 'टेबल के नीचे' बातचीत शुरू कर दी। चर्चा है कि एक भारी-भरकम रकम पुलिस तक पहुंचाई गई और इसके एवज में कानून के रक्षकों ने लुटेरों को 'सेफ एग्जिट' दे दिया। ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस ने उन पर दबाव बनाया और शिकायत दर्ज करने से रोक दिया।
*वर्दी से उठ रहा जनता का भरोसा :* सुलगते सवाल - इस सनसनीखेज घटना ने रायगढ़ पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है :
* जब अपराधी रंगे हाथों पकड़े गए थे, तो उनकी गिरफ्तारी और FIR क्यों नहीं हुई?
* क्या पुलिस अब अपराधियों की 'पार्टनर' बनकर काम कर रही है?
* गरीब ग्रामीणों की मेहनत और साक्ष्यों को पुलिस ने क्यों नजरअंदाज किया?
* क्या इस इलाके में सक्रिय लुटेरों के गिरोह को स्थानीय थाने का संरक्षण प्राप्त है?
अविश्वास की आग में झुलसता ग्रामीण अंचल - इस घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी न्याय के लिए किसके पास जाए? इस कथित 'मैनेजमेंट' के बाद अब अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जबकि ग्रामीण खुद को असुरक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
यह मामला सिर्फ एक चोरी का नहीं, बल्कि वर्दी की आड़ में फल-फूल रहे भ्रष्टाचार का है। अब देखना यह है कि क्या उच्च अधिकारी इस 'नापाक गठजोड़' की जांच करेंगे या फिर इंसाफ ऐसे ही बिकता रहेगा?

