पत्थलगांव। चिड़रापारा स्थित आदिवासी समाज की बेशकीमती भूमि से जुड़े कथित जमीन घोटाले में प्रशासन ने हल्का पटवारी मदन भगत को निलंबित कर दिया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले में बड़े अधिकारियों और कथित दलालों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र में लोग इसे केवल “खानापूर्ति” और “आईवाश” की कार्रवाई बता रहे हैं।
मामले की प्रमुख बातें
🔹 मामला चिड़रापारा स्थित आदिवासी समाज की भूमि से जुड़ा है।
🔹 संबंधित भूमि का खसरा नंबर 333/1 एवं रकबा 1.052 हेक्टेयर बताया जा रहा है।
🔹 लगातार मीडिया में खबरें आने के बाद प्रशासन ने हल्का पटवारी मदन भगत को निलंबित किया।
🔹 निलंबन के बाद अब जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
एसडीएम कोर्ट के आदेश पर उठे सवाल
🔹 बताया जा रहा है कि एसडीएम न्यायालय पत्थलगांव के प्रकरण क्रमांक 202406031100002/37/अ-6 अपील/23-24 में नामांतरण निरस्त किया गया था।
🔹 आरोप है कि बिना वारिस का नाम दर्ज किए आदेश जारी किया गया।
🔹 स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आदेश प्रक्रिया में त्रुटि थी तो केवल पटवारी पर कार्रवाई क्यों?
बड़े नामों पर कार्रवाई नहीं
🔹 मामले में कथित दलाल सुरेश यादव और तत्कालीन तहसीलदार प्रांजल मिश्रा की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
🔹 लोगों का आरोप है कि जांच में बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है।
🔹 अब तक किसी उच्च अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच या एफआईआर दर्ज नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।
जनता और आदिवासी समाज में नाराजगी
🔹 आदिवासी समाज और स्थानीय लोगों में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है।
🔹 लोगों का कहना है कि करोड़ों की जमीन से जुड़े मामले में केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है।
🔹 मांग की जा रही है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सभी जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की कार्रवाई पर बहस
🔹 पटवारी मदन भगत का निलंबन फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
🔹 लेकिन क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ छोटे कर्मचारी तक सीमित रखकर मामले को शांत करने की कोशिश है।
🔹 अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन मुख्य आरोपियों और संबंधित अधिकारियों पर आगे क्या कदम उठाता है।


