*सरगुजा।* जिले में सत्ता के रौब और अफसरशाही की लालफीताशाही के बीच एक ऐसा संग्राम छिड़ा है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। सीतापुर से BJP विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर राजापुर उप-तहसील के नायब तहसीलदार तुषार मानिक को सरेआम पीटने और कपड़े फाड़ने का गंभीर आरोप लगा है। मामला इतना गरमाया कि पुलिस को दोनों पक्षों की तरफ से काउंटर FIR दर्ज करनी पड़ी है।
*मामले के मुख्य बिंदु (एक नज़र में):*
* बवाल की जड़: विधायक की चचेरी बहन की जमीन की फाइल और कथित बदसलूकी।
* आरोप (नायब तहसीलदार): विधायक और उनके गुर्गों ने घेरकर पीटा, धक्का-मुक्की की और कपड़े फाड़ दिए। SDM को बीच-बचाव कर अधिकारी की जान बचानी पड़ी।
* आरोप (विधायक पक्ष): अधिकारी ने बहन की फाइल फेंकी, 'तुम होती कौन हो' कहकर जलील किया और ऑफिस से भगा दिया।
* एक्शन: विधायक रामकुमार टोप्पो समेत 10 लोगों पर गंभीर धाराओं में FIR। पलटवार में नायब तहसीलदार पर भी केस दर्ज।
*कैसे भड़की विवाद की चिंगारी? -*पूरी कहानी की शुरुआत 14 मई से होती है। विधायक रामकुमार टोप्पो की चचेरी बहन सीमा धनकी राजापुर उप-तहसील में जमीन के शाख शोध पत्र के लिए चक्कर काट रही थीं। आरोप है कि बाबू और नायब तहसीलदार तुषार मानिक उन्हें कई दिनों से दफ्तर के चक्कर लगवा रहे थे।
बुधवार (27 मई) को जब सीमा दोबारा दफ्तर पहुंचीं और फाइल पर तुरंत साइन करने को कहा, तो कथित तौर पर नायब तहसीलदार का पारा चढ़ गया। सीमा का आरोप है कि अधिकारी ने उनकी फाइल फेंक दी और भड़कते हुए कहा- "तुम होती कौन हो हस्ताक्षर के लिए कहने वाली? जाकर मैनपाट में हस्ताक्षर करा लो।" इसके बाद उन्हें बेइज्जत कर दफ्तर से बाहर निकाल दिया गया।
*शाम ढलते ही दिखा 'सत्ता का रौब' -*बहन के अपमान की खबर जैसे ही विधायक रामकुमार टोप्पो तक पहुंची, उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। शाम करीब 6 बजे विधायक ने सीतापुर लौट चुके नायब तहसीलदार को वापस राजापुर तलब किया। अधिकारी अपने SDM फागेश सिन्हा के साथ वहां पहुंचे।
नायब तहसीलदार तुषार मानिक के मुताबिक, वहां पहुंचते ही विधायक के समर्थकों ने उन पर धावा बोल दिया। उनका आरोप है कि खुद विधायक टोप्पो ने उन्हें किनारे बुलाया और मारपीट की। नौबत यहां तक आ गई कि SDM फागेश सिन्हा को खुद अपनी गाड़ी में नायब तहसीलदार को रेस्क्यू कर वहां से भागना पड़ा।
*थाने तक पहुंचा संग्राम: दोनों तरफ से FIR -*इस वीआईपी और प्रशासनिक भिड़ंत के बाद सीतापुर थाने में रातभर गहमागहमी रही और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर कानूनी डंडा चलाया :
* विधायक पर एक्शन: नायब तहसीलदार की शिकायत पर विधायक रामकुमार टोप्पो, यूसुफ, नाजिम राजा और पंकज गुप्ता समेत 10 लोगों के खिलाफ BNS की धारा 221, 221(1), 132 और 191(2) के तहत (शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट) का कड़ा मुकदमा दर्ज किया गया है।
* अधिकारी पर एक्शन: विधायक की बहन सीमा की रिपोर्ट पर पलटवार करते हुए नायब तहसीलदार तुषार मानिक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
*कलेक्टर का दो टूक बयान :*मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने फौरन मोर्चा संभाला। उन्होंने SDM और नायब तहसीलदार से पूरी रिपोर्ट ली। कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि, "दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने काउंटर केस दर्ज कर लिया है और अब पूरी तरह से कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या एक जनप्रतिनिधि को सरेआम कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार है? और दूसरी तरफ, क्या सरकारी दफ्तरों में आम जनता (या वीआईपी के रिश्तेदारों) को अपने ही काम के लिए इसी तरह जलील होना पड़ेगा? सरगुजा का यह 'सड़क-छाप' दंगल फिलहाल शासन और प्रशासन के बीच एक बड़ी खाई बनकर सामने आया है।
