भाग 2: जशपुरिया सर्कस का नया खेल! छोटे भाई ने किया 'खेला', अब बड़े भाई खाएंगे 'बीएमओ' का केला?

 

पत्थलगांव/जशपुर: जिला जशपुर के पत्थलगांव में इन दिनों भ्रष्टाचार की ऐसी बयार बह रही है कि ईमानदार कर्मचारी अपना सिर पीट रहे हैं और सिस्टम शर्म से लाल हो चुका है। सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है, उसे सुनकर आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे। यह किस्सा दो सगे भाइयों की जोड़ी का है, जिन्होंने सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचाने की कसम खा रखी है।
छोटे भाई ने 'झूठ' बोलकर पाई नौकरी, 'सैयां' (सरकार) भए कोतवाल तो अब डर काहे का!
अभी कुछ ही दिन पहले रविंदर निषाद नाम के महाशय का 'अनुकंपा नियुक्ति' का 'भूतिया खेल' उजागर हुआ था। आरोप है कि घर में सगे भाई के 'क्लास-1 अफसर' (शासकीय चिकित्सक) होने के बावजूद, रविंदर बाबू ने स्टाम्प पेपर पर कसम खाकर सफेद झूठ बोला कि उनके घर में कोई कमाने वाला ही नहीं है। "सत्यमेव जयते" के बोर्ड के नीचे बैठकर "झूठमेव जयते" का ऐसा नग्न प्रदर्शन शायद ही पहले कभी देखा गया हो।
अब बड़े भाई 'डॉक्टर साहब' की बारी, बीएमओ की कुर्सी पर 'मलाई-मिठाई' की तैयारी!
अब सूत्रों की मानें तो इस महा-फर्जीवाड़े के सह-अभियुक्त और रविंदर के बड़े भाई, डॉक्टर राजेंद्र निषाद खुद बीएमओ (Block Medical Officer) बनने की 'प्लानिंग' में जुट गए हैं। चर्चा गरम है कि इस पवित्र कुर्सी को पाने के लिए एक "भारी-भरकम" (शुल्क) का इंतज़ाम किया जा चुका है। लोग चटखारे लेकर कह रहे हैं कि छोटा भाई 'क्लर्क' बन गया, अब बड़ा भाई 'साहब' बनेगा, तभी तो परिवार का विकास होगा!
'राम-लखन' की जोड़ी या 'बंटी-बबली' का खेल?
यह पूरा मामला किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है। आरोप लग रहे हैं कि शासन-प्रशासन को जानकारी छिपाने में रविंदर जितना दोषी है, उतना ही डॉक्टर साहब भी हैं। दोनों ने मिलकर बातों को ऐसा तोड़ा-मरोड़ा कि खुद कानून भी चकरा जाए। अब सवाल यह है कि क्या विष्णुदेव साय सरकार में 'प्रमोशन का लड्डू' मिलेगा या फिर जेल की सलाखों के पीछे 'चक्की' पीसनी पड़ेगी?
जनता की नज़रें, साय सरकार का इम्तिहान
जशपुर के बेरोजगार युवाओं की निगाहें अब कलेक्टर महोदय और स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों पर टिकी हैं। क्या वे डॉक्टर साहब के 'प्लानिंग' पर पानी फेरेंगे? क्या रविंदर निषाद के फर्जीवाड़े की जांच होगी और सरकारी सैलरी की रिकवरी होगी? या फिर, "बड़े लोगों का हाथ" सब कुछ हजम कर जाएगा?
अगर डॉक्टर साहब बीएमओ बन जाते हैं, तो यह बात पक्की हो जाएगी कि जशपुर में न्याय सिर्फ उनके लिए है जिनके पास 'झूठ और रसूख' का पावर है। देखना बाकी है... लड्डू या लाठी?

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