शिक्षा व्यवस्था में नवाचार की नई मिसाल बने विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी बसंत चतुर्वेदी

जांजगीर चांपा
बम्हनीडीह। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी बसंत चतुर्वेदी अपनी कार्यशैली, सतत विद्यालय भ्रमण और नवाचारों के चलते शिक्षा जगत में अलग पहचान बना रहे हैं। पदभार ग्रहण करने के बाद से वे नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण कर रहे हैं तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ सीधे संवाद स्थापित कर शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

वे प्रार्थना सभा में शामिल होकर विद्यार्थियों को प्रेरणादायी संदेश देते हैं, सरस्वती वंदना का पाठ कराते हैं तथा कक्षाओं में बैठकर शिक्षण व्यवस्था का बारीकी से अवलोकन करते हैं। विद्यार्थियों की कॉपियों का परीक्षण, शिक्षकों से शैक्षणिक चर्चा और विद्यालयों की व्यवस्थाओं की समीक्षा उनकी कार्यशैली का प्रमुख हिस्सा बन गई है। इससे विद्यालयों में अनुशासन, गुणवत्ता और सकारात्मक वातावरण को नई दिशा मिल रही है।

शिक्षक हितों के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं में बसंत चतुर्वेदी का नाम लंबे समय से जाना जाता रहा है। शिक्षक आंदोलनों, संविलियन, महंगाई भत्ता और अन्य मांगों को लेकर उन्होंने सदैव सक्रिय भूमिका निभाई। अब प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलने के बाद भी वे उसी समर्पण के साथ शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं।

उनकी पहल "मोर सेवा पुस्तिका–मोर अधिकार" अभियान को शिक्षकों ने सराहनीय कदम बताया है। इस अभियान के माध्यम से शिक्षकों को अपनी सेवा पुस्तिका का स्वयं अवलोकन करने और त्रुटियों का समय पर सुधार कराने का अवसर मिल रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और सरलता बढ़ी है।

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कुरदा (चांपा) की व्याख्याता श्रीमती शांति थवाईत ने कहा कि बसंत चतुर्वेदी के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने उनके नवाचारों की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ एवं बधाई दी


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