बतौली-बगीचा मार्ग: धुल-धूसरित वादों और 'व्हाट्सएप' विकास की अनकही दास्तान [विशेष रिपोर्ट: विकास के नाम पर 'पाउडर स्नान' और 'डिजिटल' दिलासा]




बजरंग कुमार गुप्ता सरगुजा जिला ब्यूरो 

[विशेष रिपोर्ट: विकास के नाम पर 'पाउडर स्नान' और 'डिजिटल' दिलासा]

बतौली/सरगुजा: अगर आप सरगुजा जिले के बतौली से बगीचा मार्ग पर यात्रा करने की सोच रहे हैं, तो सावधान! यह कोई साधारण सड़क नहीं, बल्कि विकास के नाम पर बिछाई गई एक ऐसी 'रहस्यमयी' बिसात है, जहां कदम-कदम पर आपका स्वागत धुल के गुबार और झूठे वादों से होगा। स्थानीय प्रशासन और ठेकेदार कंपनियों की जुगलबंदी ने इस पूरे इलाके को एक ऐसे मुकाम पर ला खड़ा किया है, जहां 'विकास' सिर्फ फाइलों में और जनता धुल फांकने को मजबूर है।

'पाउडर स्नान' का मुफ्त आनंद

इन दिनों बतौली-बगीचा मार्ग पर सफर करना किसी एडवेंचर स्पोर्ट्स से कम नहीं है। सड़क निर्माण के नाम पर फैली धूल ने पूरे इलाके को एक अजीब सी सफेदी में ढंक दिया है। क्या पेड़, क्या मकान, क्या इंसान... सब के सब 'पाउडर स्नान' का मुफ्त आनंद ले रहे हैं। सुबह-सुबह घर से साफ-सुथरे निकलकर दफ्तर या बाजार जाने वाले लोग शाम को जब लौटते हैं, तो उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। वे धूल में सने किसी पुरातन अवशेष की तरह नजर आते हैं। स्थानीय निवासी व्यंग्य में कहते हैं, "हमें तो लगता है कि प्रशासन हमें मुफ्त में फेशियल और बॉडी पाउडर दे रहा है।"

चक्काजाम का 'व्हाट्सएप' समाधान

सड़क की दुर्दशा और धुल से परेशान होकर जब ग्रामीणों ने चक्काजाम करने की चेतावनी दी, तो प्रशासन और निर्माण कंपनी हरकत में आई। लेकिन उनका हरकत में आना भी किसी कॉमेडी शो से कम नहीं था। 16 अक्टूबर 2026 को 'छत्तीसगढ़ जनसंकल्प समिति' द्वारा घोषित चक्काजाम को टालने के लिए 'केपॉन्स प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' ने एक अनोखा 'व्हाट्सएप' समाधान निकाला। कंपनी के नुमाइंदों ने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया कि 16 तारीख से ही सड़क पर पानी का छिड़काव किया जाएगा और इसके सबूत के तौर पर बाकायदा व्हाट्सएप पर 'छिड़काव की फोटो' भेजी जाएगी!

वाकई, यह विकास का एक नया मॉडल है - 'फोटो भेजो, चक्काजाम रोको'। इस 'डिजिटल' दिलासे के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम स्थगित कर दिया। अब सवाल यह है कि क्या व्हाट्सएप पर फोटो भेजने से सड़क की धुल कम हो जाएगी? क्या प्रशासन यह मान बैठा है कि जनता की आंखों में धुल झोंकने के लिए व्हाट्सएप की फोटो ही काफी है?

हवा में उड़ते वादे, सड़कों पर धुल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा व्यंग्य यह है कि धुल से मुक्ति दिलाने के लिए जिस पानी के छिड़काव का वादा किया गया, वह खुद एक 'जुमला' साबित हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि पानी का छिड़काव सिर्फ नाममात्र का है, जो धुल को और अधिक कीचड़ में बदल देता है। एक ग्रामीण ने तंज कसते हुए कहा, "हमें धुल से तो मुक्ति नहीं मिली, अलबत्ता अब हम कीचड़ में फिसलकर 'गिला' होने का आनंद भी ले रहे हैं।"

सड़क निर्माण का कार्य इतने 'कछुआ गति' से चल रहा है कि ग्रामीणों को लगता है कि उनकी अगली पीढ़ी ही शायद इस पक्की सड़क पर चल पाएगी। ठेकेदार कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि कार्य प्रगति पर है, लेकिन धरातल पर धुल और गिट्टी के अलावा कुछ और नजर नहीं आता।

प्रशासन की 'रहस्यमयी' चुप्पी

इस पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। क्या प्रशासन को ग्रामीणों की परेशानी नजर नहीं आती? क्या ठेकेदार कंपनी पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है? या फिर प्रशासन भी इस 'पाउडर स्नान' और 'व्हाट्सएप विकास' के खेल में शामिल है?

आगे क्या?

चक्काजाम टलने के बाद अब ग्रामीण फिर से ठगा सा महसूस कर रहे हैं। धुल ज्यों की त्यों उड़ रही है, और व्हाट्सएप पर फोटो भेजने का खेल जारी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई और सड़क निर्माण कार्य में तेजी नहीं आई, तो वे फिर से आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बार कोई 'टेलीग्राम' समाधान निकालता है या फिर जनता को सचमुच 'पाउडर स्नान' से मुक्ति दिलाता है। तब तक, बतौली-बगीचा मार्ग पर सफर जारी है, और जनता धुल फांकती रहेगी... जय हो 'डिजिटल' विकास की!





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