20 साल बाद खुला लाल कपड़े में लिपटा खजाना, कोरबा में मिली 400 साल पुरानी पांडुलिपि

कोरबा में एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर मिली है, जिसने इतिहासकारों और संस्कृति प्रेमियों को हैरान कर दिया। भारत सरकार के ज्ञानभारतम् मिशन के सर्वेक्षण के दौरान पुराने राजमहल राजगढ़ी में करीब 400 साल पुरानी कल्चुरीकालीन हस्तलिखित पांडुलिपि खोजी गई।

यह दुर्लभ पांडुलिपि कोरबा की अंतिम शासिका रानी धनराज कुंवर देवी के परिवार में पीढ़ियों से संभालकर रखी गई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इसे लगभग 20 साल बाद पहली बार खोला गया। पांडुलिपियां इतने पुराने और कमजोर कागज़ पर लिखी हैं कि छूते ही टूटने लगती हैं। इसी वजह से इन्हें लाल कपड़े में लपेटकर पूजा घर में सुरक्षित रखा गया था।

सर्वेक्षण के दौरान कुल 27 प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ मिले, जिनमें श्रीमद्भागवत पुराण और सुखसागर बारहवां स्कंध जैसी धार्मिक पांडुलिपियां शामिल हैं। ये सभी देवनागरी और संस्कृत भाषा में काली स्याही से लिखी गई हैं।
ज्ञानभारतम् मिशन के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने मौके पर ही “ज्ञानभारतम् ऐप” के जरिए इन दुर्लभ धरोहरों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन्हें देख और समझ सकें।

इतना ही नहीं, राजपरिवार के पास अंग्रेजी शासनकाल में कोलकाता के छापाखाने से प्रकाशित लगभग 300 पन्नों की स्कंध पुराण की दुर्लभ प्रति भी मिली है, जो अब बेहद जर्जर हालत में है।

यह खोज सिर्फ कोरबा ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

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