पत्थलगांव:-पुरानी बस्ती (वार्ड क्रमांक 14) में सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग और राजनीतिक रसूख के दम पर नियमों को ताक पर रखने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि एक भाजपा नेता के निजी परिसर में सरकारी बोरिंग खुदवाई जा रही है, जबकि पूरे मामले में नगर पालिका प्रशासन और बिजली विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
मामले की मुख्य बातें
भाजपा नेता के घर के भीतर बोरिंग खुदाई
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी बोरिंग को सार्वजनिक स्थान के बजाय सीधे भाजपा नेता के निजी घर के भीतर खुदवाया जा रहा है।
जबकि वार्ड में पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध होने की बात कही जा रही है।
पालिका अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका के कुछ जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले में मौन सहमति देकर संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।
कागजों में अनभिज्ञता दिखाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि अधिकारियों की जानकारी में ही पूरा कार्य हो रहा है।
बिजली विभाग ने हटाए मुख्य वायर
बोरिंग मशीन को घर तक पहुंचाने के लिए बिजली खंभे से मुख्य तार हटाए गए।
इसके चलते वार्ड क्रमांक 14 का आधा हिस्सा घंटों बिजली संकट से जूझता रहा।
जनता अंधेरे में, वीआईपी काम जारी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आम जनता की परेशानियों को नजरअंदाज कर रसूखदार नेता को प्राथमिकता दी गई।
बिजली बाधित होने से कई घरों में जरूरी काम प्रभावित हुए।
अध्यक्ष पति का बयान
मामले पर सवाल उठने के बाद अध्यक्ष पति ने सफाई देते हुए कहा कि क्षेत्र में तीन सरकारी बोर स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से एक की खुदाई की जा रही है।
हालांकि, वे इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे सके कि यदि बोर सरकारी है तो उसकी खुदाई किसी निजी घर के भीतर क्यों की जा रही है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
वार्डवासियों में पूरे मामले को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।
लोगों का आरोप है कि नियम-कायदे सिर्फ आम जनता के लिए हैं, जबकि रसूखदारों को प्रशासनिक संरक्षण मिल रहा है।
नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
उठ रहे बड़े सवाल
सरकारी बोरिंग निजी परिसर में क्यों?
क्या पालिका प्रशासन ने नियमों को नजरअंदाज किया?
बिजली विभाग ने आम जनता की सुविधा से समझौता क्यों किया?
क्या सरकारी संसाधनों का राजनीतिक प्रभाव में दुरुपयोग हो रहा है?
पुरानी बस्ती का यह मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता और राजनीतिक प्रभाव के बीच बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
