पत्थलगांव (जशपुर)।
जशपुर जिले का पत्थलगांव इन दिनों जमीन की रजिस्ट्री और भू-माफियाओं की कथित सक्रियता को लेकर चर्चा के केंद्र में है। स्थानीय लोगों और सूत्रों के हवाले से यह आरोप लग रहे हैं कि तहसील कार्यालय में आम आदमी के जायज काम जहां फाइलों में दबे रह जाते हैं, वहीं रसूखदार जमीन दलालों के काम बिना किसी रुकावट के तेजी से निपट रहे हैं।
विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जशपुर जिले में जमीन की सबसे ज्यादा रजिस्ट्री और हेरा-फेरी के मामले इसी क्षेत्र से सामने आ रहे हैं।
आदिवासियों की जमीन पर गिद्ध दृष्टि?
क्षेत्र में सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा आदिवासियों की जमीनों के कथित हस्तांतरण और उन पर अवैध कब्जों का है। नियमों के मुताबिक, आदिवासी भूमि की खरीद-बिक्री के लिए कड़े कानूनी प्रावधान हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि भू-माफिया नियमों में खामियां ढूंढकर या कथित प्रशासनिक साठगांठ से इन जमीनों को अपने नाम करवा रहे हैं।
बड़ा सवाल: जब भी ऐसे मामलों में अनियमितता उजागर होती है, तो गाज केवल छोटे कर्मचारियों पर ही क्यों गिरती है? बड़ी मछलियां और मुख्य साजिशकर्ता हमेशा कार्रवाई के दायरे से बाहर क्यों रह जाते हैं?
'चौथे स्तंभ' पर हमला: खौफ के साए में पत्रकारिता
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस खेल को बेनकाब करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में एक स्थानीय पत्रकार के अपहरण और मारपीट का मामला सुर्खियों में रहा था, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। खबरों को दबाने के लिए पत्रकारों को जान से मारने की धमकियां मिलना अब आम बात होती जा रही है।
आरोप है कि प्रशासन द्वारा इस दिशा में की गई कार्रवाई अब तक नाकाफी रही है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
इस पूरे मामले में जब प्रशासनिक अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया। अधिकारियों का कहना है कि:
सभी रजिस्ट्रियां नियमों के तहत और पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही की जाती हैं।
यदि कहीं कोई शिकायत मिलती है, तो उस पर निष्पक्ष जांच की जाएगी।
पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
निष्कर्ष
पत्थलगांव में जमीन के कारोबार में पारदर्शिता लाना और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करना वर्तमान प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। यदि समय रहते भू-माफियाओं और कथित भ्रष्टाचार पर नकेल नहीं कसी गई, तो जनता का शासन और प्रशासन से भरोसा उठना तय है। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इन गंभीर आरोपों पर क्या कड़ा रुख अपनाते हैं।
