पत्थलगांव, जशपुर (छत्तीसगढ़)
सत्ता की हनक और रसूख का ऐसा खेल शायद ही कहीं और देखने को मिले! पत्थलगांव में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून और प्रशासन की कोई परवाह ही नहीं है। ताजा मामला महिला मोर्चा की एक पदाधिकारी से जुड़ा है, जिन पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर धड़ल्ले से पक्का निर्माण कराने का संगीन आरोप लगा है।
"हम खास हैं, नियम आम जनता के लिए हैं!"
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इनसे कोई सवाल कर ले, तो मैडम का 'नाटक' और रसूख देखने लायक होता है। खुद को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पत्नी कौशल्या साय का "खास" बताने वाली ये नेत्री शायद यह भूल चुकी हैं कि संविधान और कानून सबके लिए बराबर होता है। लेकिन पत्थलगांव में हालात कुछ ऐसे हैं कि यदि आप बीजेपी के कार्यकर्ता या पदाधिकारी हैं, तो मानो आपको "कुछ भी करने का खुला लाइसेंस" मिल गया हो!
शिकायत पत्र के खुलासे: कागजों में क्या है?
तथ्यों और प्रशासनिक दस्तावेजों (शिकायत व प्रार्थना पत्र) के अनुसार:
* अवैध निर्माणकर्ता: श्रीमती उर्मिला पटेल, पति श्री मुकुट नारायण पटेल (महिला मोर्चा पदाधिकारी)।
* स्थान: पुरानीबस्ती, मरघट रोड, पत्थलगांव, जिला - जशपुर (छ.ग.) - 496118।
* भूमि का प्रकार: शासकीय भूमि (सरकारी जमीन) / सार्वजनिक संपत्ति।
* नगरीय निकाय स्वीकृति: नगर पालिका से कोई मानचित्र या भवन निर्माण अनुमति प्राप्त नहीं की गई है।
प्रमुख कानूनी व प्रशासनिक उल्लंघन
तैयार किए गए शिकायत पत्र में साफ तौर पर निम्नलिखित उल्लंघनों का जिक्र किया गया है:
* शासकीय संपत्ति पर बेजा कब्जा: निजी स्वार्थ के लिए सरकारी जमीन का खुलेआम अतिक्रमण।
* छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम का उल्लंघन: बिना किसी वैध मानचित्र या निर्माण स्वीकृति के अवैध और अवैध निर्माण कार्य जारी।
* जन-सुविधा पर प्रभाव: मरघट रोड मार्ग पर अतिक्रमण होने से भविष्य में आम जनता का मार्ग अवरुद्ध होना तय है।
प्रशासन की चुप्पी पर बड़ा व्यंग्य
हैरानी की बात यह है कि गरीबों के लिए कानून के डंडे तुरंत हरकत में आ जाते हैं, लेकिन सत्ताधारी दल के नेताओं के अवैध महलों के आगे प्रशासन की फाइलें और आंखें दोनों बंद हो जाती हैं। क्या तहसील और नगर पालिका के अधिकारी किसी बड़े राजनीतिक दबाव के चलते इस अवैध निर्माण पर आंख मूंदकर बैठे हैं?
अब देखना यह होगा कि क्या राजस्व विभाग और नगर पालिका परिषद की संयुक्त टीम इस रसूखदार नेत्री पर कोई ठोस कार्रवाई करती है, या फिर यह शिकायत भी कागजी फाइलों में ही दमकती रह जाएगी? पत्थलगांव की जनता टकटकी लगाए बैठी है कि क्या प्रशासन में रीढ़ की हड्डी बची है या फिर 'खास' लोगों के सामने कानून घुटने टेक चुका है!
