*पत्थलगांव सिविल अस्पताल में 'महा-विस्फोट': सरगुजा जेडी अनिल शुक्ला के औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप, स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल!*


 

*पत्थलगांव* ।

पत्थलगांव सिविल अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया और पूरे स्वास्थ्य महकमे के होश उड़ गए, जब सरगुजा संभाग के जॉइंट डायरेक्टर (जेडी) डॉ. अनिल शुक्ला अचानक औचक निरीक्षण करने अस्पताल पहुंच गए। इस निरीक्षण में अस्पताल के भीतर चल रहे जिस 'अंधेर नगरी चौपट राजा' वाले खेल का पर्दाफाश हुआ है, उसने पूरे जिले की स्वास्थ्य प्रणाली पर एक बड़ा कलंक लगा दिया है।


 *कर्मचारियों की घोर लापरवाही* , मरीजों के प्रति उदासीन रवैया और चारों तरफ फैली अव्यवस्था को देखकर जॉइंट डायरेक्टर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।


🚨 *एडवांस में हाजिरी!* आने वाले दिनों का अटेंडेंस रजिस्टर देखकर उड़े होश

निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक खुलासा तब हुआ जब जेडी ने उपस्थिति रजिस्टर की जांच की। अस्पताल के कर्मचारियों की इस कदर मनमानी चल रही है कि कई कर्मचारियों ने आने वाले दिनों के लिए पहले से ही एडवांस में हस्ताक्षर (हौजरी) कर रखे थे! वहीं दूसरी तरफ, कुछ कर्मचारी कई दिनों से बिना बताए गायब थे और उनके हस्ताक्षर ही नहीं थे। इस महा-फर्जीवाड़े को देखकर जेडी हैरान रह गए और उन्होंने मौके पर ही बीएमओ (BMO) की क्लास लगाते हुए संबंधित लापरवाह कर्मचारियों का वेतन रोकने के सख्त निर्देश जारी कर दिए।


🏥 *अस्पताल या नरक? गंदी चादरें, कबाड़ दवा स्टोर और बदहाल वार्ड* 

सिविल अस्पताल के भीतर कदम रखते ही जेडी को चारों तरफ बदहाली का मंजर दिखाई दिया। मरीजों को गंदी और बदबूदार चादरों पर सुलाया जा रहा था। अस्पताल का दवा स्टोर किसी कबाड़खाने से कम नहीं था, जहां पुरानी दवाइयां अत्यंत अव्यवस्थित ढंग से फेंकी हुई मिलीं। वार्डों की इस दुर्दशा और सफाई के प्रति घोर लापरवाही को देखकर जॉइंट डायरेक्टर ने गहरी नाराजगी जाहिर की और दवाओं की उचित रख-रखाव व सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।


💸 *डॉक्टरों की कमीशनखोरी पर कड़ा प्रहार: "निजी अस्पतालों में रेफर करना बर्दाश्त नहीं"* 

अस्पताल में आने वाले गरीब मरीजों को लूटने का एक और बड़ा खेल उजागर हुआ है। डॉक्टरों द्वारा मरीजों को अनावश्यक रूप से प्राइवेट अस्पतालों में रेफर किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। जेडी अनिल शुक्ला ने इस कमीशनखोरी के धंधे पर कड़ी चेतावनी देते हुए साफ लफ्जों में कहा कि मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर धकेलना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि ऐसी शिकायत दोबारा मिली, तो सीधे कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।


🍾 *शराबी गार्डों की तत्काल छुट्टी, 108 एम्बुलेंस सेवा पर भी गिरी गाज* 

स्थानीय नागरिकों ने शिकायत की थी कि अस्पताल के सुरक्षा गार्ड अक्सर ड्यूटी से नदारद रहते हैं और अस्पताल परिसर में ही शराब का सेवन करते हैं। जेडी ने इस गंभीर शिकायत को तुरंत संज्ञान में लेते हुए दोनों शराबी गार्डों को तत्काल नौकरी से हटाने के निर्देश दिए और उनकी जगह जिम्मेदार कर्मियों को रखने को कहा। इसके अलावा, जीवनदायिनी कही जाने वाली 108 संजीवनी एम्बुलेंस सेवा में भी भारी लापरवाही मिलने पर संबंधित कर्मचारी को बाहर का रास्ता दिखाने (हटाने) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


🤰 *प्रसव कक्ष में सिर्फ 26 डिलीवरी! स्टाफ को कैनुला लगाना तक नहीं आता* 

इतने बड़े सिविल अस्पताल के प्रसूति वार्ड का सच जानकर जेडी दंग रह गए। पूरे महीने में केवल 26 डिलीवरी होना स्टाफ की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जेडी ने स्टाफ नर्सों को प्रतिदिन 3 से 4 बार डिलीवरी कक्ष की सफाई करने के निर्देश दिए।

हद तो तब हो गई जब वार्ड निरीक्षण में यह सामने आया कि स्टाफ नर्सों को मरीजों को कैनुला (Canula) लगाने तक का सही बुनियादी तरीका नहीं मालूम था। जब जेडी ने उनसे इस प्रक्रिया को लेकर सवाल पूछे, तो नर्सें बगलें झांकने लगीं। इस पर जेडी ने बीएमओ से दो टूक कहा कि यदि स्टाफ को बुनियादी चिकित्सा का ज्ञान और प्रशिक्षण नहीं है, तो इनके प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।


👩‍⚕️ *महिला डॉक्टर के कक्ष में अवांछित डॉक्टरों की मौजूदगी पर भड़के जेडी* 

निरीक्षण के दौरान महिला डॉक्टर के केबिन (कक्ष) की मर्यादा का उल्लंघन होता भी पाया गया। वहां अन्य डॉक्टरों की अनावश्यक मौजूदगी को देखकर जेडी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सख्त निर्देश दिया कि महिला डॉक्टर के कक्ष में केवल संबंधित महिला स्टाफ और मरीज ही मौजूद रहेंगे, किसी और का बेवजह वहां बैठना प्रतिबंधित होगा।


⚠️ " *एक सप्ताह का अल्टीमेटम, नहीं सुधरी व्यवस्था तो होगी बड़ी कार्रवाई"* 

जॉइंट डायरेक्टर अनिल शुक्ला ने पत्थलगांव सिविल अस्पताल के पूरे अमले को एक सप्ताह का अंतिम अल्टीमेटम थमा दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि एक हफ्ते के भीतर अस्पताल की सूरत और सीरत नहीं सुधरी, डॉक्टरों की कमीशनखोरी बंद नहीं हुई और व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं, तो इसके बाद सीधे निलंबन और बर्खास्तगी जैसी बड़ी और ऐतिहासिक दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


 *विस्फोटक सवाल:* अब देखना यह होगा कि इस महा-निरीक्षण और जेडी की फटकार के बाद पत्थलगांव सिविल अस्पताल का ढर्रा सुधरता है या 'मलाई खाने' के आदी हो चुके अधिकारी-कर्मचारी फिर से मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करना शुरू कर देंगे?

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