*वाड्रफनगर/बलरामपुर:*
21वीं सदी के 'डिजिटल इंडिया' में बलरामपुर जिले का वाड्रफनगर ब्लॉक एक अलग ही जादुई दुनिया में जी रहा है। यहाँ सूरज उगता तो है, लेकिन बिजली विभाग की कृपा से उजाला कब अंधेरे में बदल जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं।
दिन में दस-बारह बार कटती बिजली ने यहाँ के आम नागरिकों, दुकानदारों, स्कूल-कॉलेजों और सरकारी दफ्तरों को 'अंधकार युग' की याद दिला दी है। कामकाज तो ऐसे ठप्प रहता है मानो बिजली विभाग ने इलाके में स्थायी 'शांति व्यवस्था' लागू करने का बीड़ा उठा रखा हो।
### **बलरामपुर के अंतिम छोर का 'साइंस प्रोजेक्ट'**
क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का बिजली विभाग ने बड़ा नायाब अध्ययन किया है। वाड्रफनगर से लेकर बलरामपुर की आखिरी सीमा तक... अगर कहीं एक बिजली के तार को छींक भी आ जाए, तो सबसे पहले बुखार वाड्रफनगर की सप्लाई को चढ़ता है!
सिस्टम इतना संवेदनशील है कि सीमा क्षेत्र में कहीं भी कोई पत्ता गिरे, वाड्रफनगर की बिजली तुरंत ‘शोक सभा’ मनाने में जुट जाती है और पूरे इलाके को अंधेरे के हवाले कर देती है।
### **बिजली विभाग की मुफ़्त सलाह: "लाइट माँगते क्यों हो, इनवर्टर क्यों नहीं लगाते?"**
जब परेशान जनता बिजली दफ़्तर के चक्कर काट-काटकर और अधिकारियों को फोन लगाकर अपनी लाचारी जताती है, तो विभाग से एक बेहद 'क्रांतिकारी' और 'तकनीकी' समाधान मिलता है—
> *"अरे साहब! बिजली के भरोसे क्यों बैठे हो? घर और दुकान में इनवर्टर क्यों नहीं लगवा लेते?"*
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वाह! क्या दूरदर्शी सलाह है! बिजली विभाग का यह रवैया देखकर लगता है कि जल्द ही वे अपने बिल पर यह टैगलाइन भी लिखवा देंगे— **"हमारा काम सिर्फ बिल भेजना है, बिजली की उम्मीद रखना आपकी अपनी व्यक्तिगत भूल होगी।"**
अब जनता सोच रही है कि जब हर काम इनवर्टर और जनरेटर से ही चलाना है, तो विभाग को हर महीने फालतू का बिजली बिल देकर उनके दफ्तर के चाय-पानी का खर्चा क्यों उठाया जाए?
### **1912 हेल्पलाइन: समस्या दूर हो न हो, मैसेज 10 मिनट में हाजिर!**
बिजली विभाग की 'सुपरफास्ट' कार्यप्रणाली का सबसे बड़ा नमूना उनकी हेल्पलाइन 1912 है।
* **स्टेप 1:** आप पसीना पोंछते हुए 1912 पर शिकायत दर्ज कराते हैं।
* **स्टेप 2:** शिकायत दर्ज हुए अभी 10-15 मिनट भी नहीं बीतते कि आपके फोन की घंटी बजती है।
* **स्टेप 3:** एक खूबसूरत सा मैसेज आता है— *"आपकी समस्या का सफलतापूर्वक समाधान कर दिया गया है।"*
* **स्टेप 4:** आप अपने पंखे को देखते हैं... वो अभी भी पंखे की जगह सिर्फ 'शो-पीस' बनकर लटका हुआ है!
समस्या वही की वही है, लेकिन कागजों और सर्वर पर वाड्रफनगर में 24 घंटे 'रोशनी का त्योहार' मनाया जा रहा है। जादूगर भी ऐसी सफाई से हाथ नहीं सफाई करते, जैसी तेजी से 1912 वाले समस्या हल कर देते हैं।
### **जनता की हुंकार: अब 'रोशनी' चाहिए, मैसेज नहीं!**
व्यापारियों का धंधा चौपट हो चुका है, बच्चे मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ने को मजबूर हैं और दफ्तरों में कंप्यूटर बिना बिजली के शो-पीस बने हुए हैं। जनता का सब्र अब जवाब दे चुका है।
अगर बिजली विभाग ने अपने इस 'इनवर्टर ज्ञान' और 'मैसेज खेल' को बंद करके असल में बिजली सप्लाई सुधारने पर ध्यान नहीं दिया, तो बहुत जल्द बलरामपुर की जनता बिजली दफ़्तर के बाहर ही अपना 'इनवर्टर' लेकर मोमबत्ती जुलूस निकालने को मजबूर होगी।
**देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों की नींद कब खुलती है, या फिर वे भी इनवर्टर के बैकअप पर ही सो रहे हैं!**
