बगीचा (24/10/2026): देश और प्रदेश में भले ही 'स्वच्छ भारत मिशन' के बड़े-बड़े विज्ञापनों और होर्डिंग्स से हवा बांधी जा रही हो, लेकिन छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बगीचा तहसील कार्यालय में यह अभियान सिर्फ कागजों और भाषणों तक ही सीमित नजर आता है। यहाँ की स्थिति देखकर तो ऐसा लगता है कि व्यवस्थाओं ने खुद ही यहाँ स्वच्छता से तौबा कर ली है और गंदगी ने कार्यालय पर स्थायी कब्जा जमा लिया है।
🚯 कागजों पर 'स्वच्छता', धरातल पर कचरे का साम्राज्य!
एक तरफ सरकार जनता को साफ-सुथरे वातावरण का पाठ पढ़ाने में करोड़ों रुपये फूँक रही है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता को न्याय और सरकारी कागजात की आस में आने वाले इस तहसील कार्यालय में कदम रखते ही 'गंदगी के भव्य दर्शन' हो जाते हैं।
चारों तरफ पसरा कचरा: कार्यालय परिसर और आसपास का हाल ऐसा है मानो यह कोई सरकारी दफ्तर न होकर कोई लावारिस कचरा डंपिंग यार्ड हो।
मच्छरों का पाँच-तारा होटल: यहाँ जमा गंदा पानी और कचरा मच्छरों के लिए किसी आलीशान होटल से कम नहीं है, जो दिन-दहाड़े आगंतुकों का 'स्वागत' करने को तैयार बैठे रहते हैं।
बदबूदार गलियारे: फाइलों की खूशबू की जगह यहाँ सड़ती गंदगी की दुर्गंध ने कब्जा कर रखा है, जिससे काम करवाने आने वाले बुजुर्गों और आम नागरिकों का दम घुटने लगता है।
💥 तीखा व्यंग्य: "शायद यह कोई अनोखा 'गंदगी बचाओ आंदोलन' है!"
"लगता है बगीचा तहसील के हुक्मरानों ने स्वच्छता मिशन को गलत समझ लिया है। वे शायद देश को स्वच्छ करने के बजाय, अपनी कुर्सी के चारों ओर गंदगी का एक ऐसा सुरक्षा चक्र बनाना चाहते हैं जिससे कोई आम आदमी या फाइल उन तक पहुँच ही न सके!"
जब जिम्मेदार अधिकारी खुद कार्यालय की इस दयनीय स्थिति पर आँखें मूंदकर बैठे हों, तो भला आम जनता किससे गुहार लगाए? जनता का काम करवाने के लिए बनी यह तहसील खुद ही अपने उद्धार के लिए रो रही है।
🎯 अब आगे क्या?
बगीचा तहसील की इस पोल ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता को उजागर कर दिया है। क्या उच्च अधिकारी और जिला प्रशासन इस खबर के बाद नींद से जागेगा या फिर जनता इसी तरह गंदगी और बदहाली के साए में अपने काम करवाने को मजबूर रहेगी?
सवाल साफ़ है— जब न्याय के मंदिरों के बाहर ही गंदगी का साम्राज्य होगा, तो व्यवस्था की स्वच्छता की उम्मीद भला किससे की जाए?
वीडियो क्लिप जरुर देखे
https://youtu.be/NsMMDkfOMxs?si=e01zFc2t3l4nTpaY









