जशपुर :- सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जब प्रदेश में नई सरकार बनी तो मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री द्वारा सख्त आदेश दिया गया कि शिक्षा विभाग का कोई भी कर्मचारी किसी भी अन्य विभाग में कार्यव्यवस्था या संलग्नीकरण के तहत नहीं जा सकता है इन के द्वारा कार्यव्यवस्था और शंलग्नीकरण को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया था पर जशपुर जिले में इस आदेश को अपने पैरों तले मसल के कुछ स्कूल के शिक्षक, व्याख्यात बाहर अन्य विभागों में कार्यव्यवस्था के कार्यरत है जब की जिला शिक्षा अधिकारी और उन के स्कूल के प्राचार्यों द्वारा इन को किस आदेश के तहत मूलपद से कार्य मुक्त कर दूसरी जगह के लिए भेजा गया । ऐसे कई मामले जिले में देखे गए है जिस में पत्थलगांव के कुछ स्कूल भी शामिल है जहां के शिक्षक, व्याख्याता अपनी मर्जी से बाहर शहरों के विभागों में खुद को कार्यव्यवस्था में अटैच करवा लेते है और जिला शिक्षा अधिकारी प्राचार्य इन को उस स्थान में जाने के लिए रिलीभ भी कर देते है । अब ये मन मनी चरम सीमा पर आ चुकी है ।
एक ओर राज्य सरकार शिक्षा को मजबूत करने में लगी है और वहीं दूसरी ओर ऐसे कर्मचारी दिमग की तरह शिक्षा के क्षेत्र को अंदर ही अंदर खोखला करने में लगे है ऐसे लोगों को सिर्फ तनखा मिलते रहे और ये शहरों में रह कर मौज मस्ती के साथ सुख मय जीवन जीना जानते है इन को बच्चे बच्चियों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है ।
इस मामले को मुख्यमंत्री महोदय के संज्ञान में दे दिया गया है देखना है कि ऐसा लोगो पर अब क्या कारवाही होती है ।
