भाग 3
पत्थलगांव (छत्तीसगढ़): पत्थलगांव क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन को लेकर एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है। भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने साधारण ग्रामीणों के साथ-साथ क्षेत्र के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक रामपुकार सिंह की जमीन को भी नहीं बख्शा। इस धोखाधड़ी के विरोध में आदिवासियों ने विशाल रैली निकालकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
नक्शा और खसरा में हेर फेर का खेल आंदोलनकारियों का आरोप है कि भू-माफिया राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर जमीनों के नक्शा, खसरा और रिकॉर्ड में हेर फेर कर रहे हैं। आदिवासियों की पैतृक संपत्तियों को कूट रचित दस्तावेजों के जरिए दलालों के नाम पर हस्तांतरित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश है, जिसके तहत आदिवासियों को उनकी अपनी ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है।
पूर्व विधायक ने भी झेली दलालों की मार हैरानी की बात यह है कि इस षडयंत्र का शिकार पूर्व विधायक रामपुकार सिंह भी हुए हैं। उनकी जमीन पर भी भू-माफियाओं द्वारा अवैध तरीके से कब्जे या कागजी हेर फेर की बात सामने आई है। इस खुलासे के बाद से स्थानीय लोगों में आक्रोश और भी बढ़ गया है, क्योंकि जब एक पूर्व जनप्रतिनिधि की जमीन सुरक्षित नहीं है, तो आम आदिवासी खुद को असहाय महसूस कर रहा है
कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने खोला मोर्चा
इस गंभीर मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है। बैज ने कहा कि "आदिवासियों की जमीन पर डकैती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार और प्रशासन को इस सिंडिकेट को तोड़ना चाहिए और पीड़ितों को उनका हक वापस दिलाना चाहिए।
"रैली निकालकर दी चेतावनी
हजारों की संख्या में जुटे आदिवासियों ने सड़क पर उतरकर जमकर नारेबाजी की और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। रैली में शामिल लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नक्शा-खसरा में हुए इस भ्रष्टाचार को ठीक नहीं किया गया और भू-माफियाओं को जेल नहीं भेजा गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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